वादी और पुलिस की मिलीभगत से फंसाया गया निर्दोष आरोपी दोषमुक्त, अदालत ने विवेचक के विरुद्ध कार्रवाई के दिए निर्देश

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आगरा ।

गैर इरादतन हत्या के एक मामले में वादी मुकदमा और पुलिस की मिलीभगत से झूठे केस में फंसाए गए निर्दोष आरोपी को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे-10) माननीय प्रदीप कुमार की अदालत ने दोषमुक्त कर दिया है।

इसके साथ ही, न्यायालय ने मामले के विवेचक (इंस्पेक्टर) के कार्य आचरण को गंभीर मानते हुए उनके विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई करने के लिए पुलिस आयुक्त को निर्देश जारी किए हैं।

थाना अछनेरा क्षेत्र के ग्राम साधन निवासी वादी मुकदमा साजिद ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी कि 27 फरवरी 2023 की सुबह करीब 5:30 बजे उसके चाचा राजन शौच के लिए खेतों की तरफ जा रहे थे।

आरोप था कि गांव के ही सतीश पुत्र महावीर ने अपने खेत की बाड़ में अवैध रूप से बिजली का करंट प्रवाहित कर रखा था, जिसकी चपेट में आने से राजन गंभीर रूप से घायल हो गए और अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

इस तहरीर पर पुलिस ने आरोपी सतीश के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया था।

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अभियोजन पक्ष की ओर से वादी साजिद, डॉक्टर विशाल उपाध्याय और विवेचक इंस्पेक्टर चिदानंद प्रकाश सहित कुल छह गवाह अदालत में पेश किए गए।

वहीं, बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव चौधरी और हेमंत चौधरी ने न्यायालय में सशक्त तर्क प्रस्तुत किए।

अधिवक्ताओं ने बताया कि वादी और आरोपी के बीच पहले से रंजिश चली आ रही थी। वादी के घर में शौचालय बना हुआ था, ऐसे में सुबह शौच के लिए बाहर जाने का दावा संदेहास्पद था।

सबसे बड़ी खामी यह उजागर हुई कि मुकदमे के विवेचक ने कथित घटनास्थल यानी आरोपी के खेत से कोई तार बरामद नहीं किया था, बल्कि तार वादी के पास से दिखाया गया था।

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आरोपी के पक्ष में गांव के निवासी धर्मवीर और भिक्की ने अदालत में गवाही देते हुए स्पष्ट किया कि मृतक राजन रात के समय जानवरों से बचाव के लिए स्वयं अपने खेत के तारों में ट्यूबवेल से बिजली का कनेक्शन जोड़ता था और उसी दौरान करंट लगने से उसकी मृत्यु अपने ही खेत में हुई थी।

गवाहों ने बताया कि सतीश का खेत मृतक के खेत से दो-तीन खेत छोड़कर है और वहां कोई तार नहीं लगा था।

एडीजे-10 माननीय प्रदीप कुमार ने पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन किया और पाया कि घटना का कोई भी प्रत्यक्षदर्शी गवाह नहीं है।

बचाव पक्ष के गवाहों के बयानों और साक्ष्यों से यह स्पष्ट हुआ कि मुकदमे के विवेचक चिदानंद प्रकाश ने वादी मुकदमा के साथ मिलकर अभियुक्त सतीश को इस झूठे केस में फंसाया था।

न्यायालय ने आरोपी सतीश को दोषमुक्त करते हुए विवेचक के खिलाफ विभागीय या कानूनी कार्रवाई करने के लिए पुलिस आयुक्त को आदेश जारी किए हैं।

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विवेक कुमार जैन
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