आगरा/प्रयागराज।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आगरा की दो बालिग महिलाओं के धर्म परिवर्तन और अपनी पसंद से विवाह करने के मामले में दाखिल बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर एक महत्वपूर्ण विधिक आदेश जारी किया है।
न्यायमूर्ति संदीप जैन की एकलपीठ ने राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि दोनों महिलाओं को 6 अगस्त 2026 को अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया जाए, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे अपनी स्वतंत्र इच्छा से निर्णय ले रही हैं या किसी अवैध हिरासत अथवा दबाव में हैं।
अदालत ने प्रथम दृष्टया माना है कि यदि याचिका में प्रस्तुत किए गए तथ्य सही हैं, तो दोनों बालिग महिलाओं को अपने धर्म, विवाह, निवास और जीवन से जुड़े फैसले स्वयं लेने का पूर्ण अधिकार है।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार का अनावश्यक हस्तक्षेप उनकी गरिमा, निजता, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और निर्णय लेने के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन माना जाएगा।
याचिका में कहा गया था कि दोनों महिलाएं बालिग हैं और उन्होंने बिना किसी दबाव, प्रलोभन या जबरदस्ती के अपनी स्वेच्छा से हिंदू धर्म छोड़कर इस्लाम धर्म अपनाया है।
इसके साथ ही उन्होंने अपनी पसंद के व्यक्तियों से विवाह करने का निर्णय लिया है, जो कि संविधान द्वारा प्रदत्त व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार है।
याचिकाकर्ता की ओर से आरोप लगाया गया कि महिलाओं के पिता उनकी इच्छा के विरुद्ध जाकर झूठी एफआईआर दर्ज करा रहे हैं और स्थानीय पुलिस की मिलीभगत से उन्हें उनकी इच्छा के विरुद्ध रोका गया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि यदि निर्धारित तिथि 6 अगस्त को दोनों महिलाओं को अदालत में पेश नहीं किया जाता है, तो संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत शपथपत्र दाखिल कर यह स्पष्ट करना होगा कि आदेश का पालन क्यों नहीं हो सका और उन्हें प्रस्तुत करने के लिए क्या प्रयास किए गए।
मामले की अगली सुनवाई 6 अगस्त को निर्धारित की गई है।
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