आगरा।
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-1 माननीय यशवंत कुमार सरोज की अदालत ने छात्रा के अपहरण और दुराचार के करीब 15 वर्ष पुराने मामले में अहम फैसला सुनाया है।
अदालत ने बयानों में गंभीर विरोधाभास और साक्ष्य के अभाव में चारों आरोपियों को दोषमुक्त करार देते हुए बरी करने का आदेश दिया।
बरी होने वालों में धर्मवीर, उदयवीर, नरेश सिंह (निवासी निहाल बाग, जगदीशपुरा) और बहादुर सिंह (निवासी छे पोखर, अछनेरा) शामिल हैं।
थाना जगदीशपुरा में दर्ज मामले के अनुसार, पीड़िता ने आरोप लगाया था कि 1 मार्च 2010 को जब वह कक्षा 12 की छात्रा थी और ट्यूशन जा रही थी, तब कार सवारों ने जेवर का रास्ता पूछने के बहाने उसे खींचकर कार में डाल लिया और अपहरण कर लिया।
आरोप था कि उसे राजस्थान के बांदीकुई ले जाकर किराए के कमरे में रखा गया, जहां बहादुर सिंह और धर्मवीर ने उसके साथ दुराचार किया। इसके बाद उसे निहाल बाग लाकर भी दुराचार किया गया। सूचना मिलने पर पुलिस ने उसे बरामद किया था।
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मुकदमे के विचारण के दौरान अभियोजन की ओर से पीड़िता, डॉक्टर नीना माथुर, निरीक्षक सुरेश सिंह और पुलिसकर्मी हतेंद्र सिंह के बयान दर्ज कराए गए।
चिकित्सीय परीक्षण के दौरान डॉक्टर द्वारा पीड़िता के साथ दुराचार की पुष्टि नहीं की गई थी। वहीं, आरोपी पक्ष की ओर से मुख्य आरोपी बहादुर सिंह के संबंध में साक्ष्य प्रस्तुत किए गए कि वह रेलवे में चालक पद पर कार्यरत है और घटना के दिन वह मथुरा से रेलगाड़ी लेकर हरियाणा के रेवाड़ी ड्यूटी पर गया हुआ था।
अदालत ने पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों, मेडिकल रिपोर्ट और पीड़िता के बयानों में पाए गए गंभीर विरोधाभास को आधार मानते हुए सभी आरोपियों को बरी कर दिया।
मामले में आरोपियों की ओर से पैरवी वरिष्ठ अधिवक्ता डीसी गोयल और गौरव गोयल ने की।
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