आगरा में राष्ट्रीय लोक अदालत का भव्य आयोजन, 6.76 लाख से अधिक वादों का हुआ ऐतिहासिक निस्तारण

न्यायालय मुख्य सुर्खियां

आगरा, 12 सितंबर 2026।

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली तथा उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के दिशा-निर्देशों के अनुपालन में शनिवार को जनपद आगरा में राष्ट्रीय लोक अदालत का व्यापक स्तर पर आयोजन किया गया।

इस विधिक महाभियान का विधिवत उद्घाटन जनपद न्यायाधीश माननीय संजय कुमार मलिक द्वारा दीप प्रज्वलन एवं माँ सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर किया गया।

इस अवसर पर न्यायिक जगत, प्रशासनिक तंत्र, बैंकिंग क्षेत्र और मीडिया जगत से जुड़े तमाम अधिकारी व प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

समारोह में प्रमुख रूप से मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के पीठासीन अधिकारी माननीय रामविलास, नोडल अधिकारी व अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (न्यायालय संख्या-प्रथम) माननीय पुष्कर उपाध्याय , अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (न्यायालय संख्या-26) माननीय अमरजीत, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट माननीय शारिब अली, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के पूर्णकालिक सचिव व अपर जिला जज माननीय पंकज कुमार-प्रथम, उपभोक्ता आयोग प्रथम के अध्यक्ष माननीय सर्वेश कुमार ,स्पेशल न्यायालय तृतीय के पीठासीन अधिकारी माननीय महेश नौटियाल सहित समस्त न्यायिक अधिकारीगण तथा लीड डिस्ट्रिक्ट मैनेजर ऋषिकेश बनर्जी उपस्थित रहे।

इसके अतिरिक्त विभिन्न बैंकों व मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनियों के उच्चाधिकारी, प्रतिनिधि, अधिवक्तागण, वादकारी, पराविधिक स्वयंसेवक (पीएलवी), पत्रकार व

मीडियाकर्मी तथा न्यायालय कर्मचारी बड़ी संख्या में मौजूद रहे।

लोक अदालत के अंतर्गत विभिन्न पीठों द्वारा त्वरित एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में मामलों का निस्तारण किया गया:

जनपद न्यायाधीश माननीय संजय कुमार मलिक ने स्वयं 4 वादों का निस्तारण किया।

वहीं अन्य समस्त अपर जनपद न्यायाधीशगण की अदालतों द्वारा विभिन्न प्रकृति के 1,365 वादों का निस्तारण करते हुए 44,23,500/- रुपये की जुर्माना धनराशि अधिरोपित की गई।

परिवार न्यायालय एवं अतिरिक्त परिवार न्यायालयों द्वारा आपसी समन्वय व सुलह के माध्यम से 86 पारिवारिक विवादों का सफल निस्तारण कराया गया।

मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण में पीठासीन अधिकारी माननीय रामविलास की पीठ ने 140 वादों का निस्तारण किया।

इसके तहत पीड़ित पक्षों को कुल 10,95,70,000/- रुपये (दस करोड़ पचानवे लाख सत्तर हजार रुपये) की क्षतिपूर्ति धनराशि प्रदान करने का निर्णय पारित किया गया।

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (रेलवे), अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, सिविल जज, अपर सिविल जज, न्यायिक मजिस्ट्रेट एवं अन्य अधीनस्थ न्यायालयों द्वारा कुल मिलाकर 13,222 वादों का निस्तारण किया गया।

जिला उपभोक्ता प्रतितोष आयोग-प्रथम व द्वितीय, स्थायी लोक अदालत तथा कॉमर्शियल कोर्ट-प्रथम व द्वितीय द्वारा कुल 37 मामलों का निपटारा हुआ।

वहीं वर्चुअल न्यायालय द्वारा ई-चालान प्रणाली के अंतर्गत कुल 1,53,275 मोटर वाहन चालानों का निस्तारण किया गया।

इस महा-अभियान का दायरा केवल दीवानी कचहरी परिसर तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि इसे विकेंद्रीकृत करते हुए तहसील स्तर, ब्लॉक स्तर, समस्त पुलिस आयुक्त कार्यालय, यातायात चालान प्रकोष्ठ, ग्रीन गैस लिमिटेड, मोबाइल फोन कंपनियों, वैवाहिक प्री-लिटिगेशन केंद्र, भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल), टोरण्ट पावर लिमिटेड, समस्त खंड विकास कार्यालयों और फाइनेंस कंपनियों के परिसरों में भी आयोजित किया गया।

बैंकों और वित्तीय संस्थानों से जुड़े मामलों में भी व्यापक समझौता कराया गया। भारतीय स्टेट बैंक, यूको बैंक, ग्रामीण बैंक ऑफ आर्यावर्त, पंजाब नेशनल बैंक, यूनियन बैंक, सिंडिकेट बैंक तथा अन्य निजी व सार्वजनिक वित्तीय संस्थाओं के कुल 1,341 वादों का प्री-लिटिगेशन के माध्यम से निस्तारण कराया गया, जिसमें 11,97,74,000/- रुपये (ग्यारह करोड़ सत्तानवे लाख चौहत्तर हजार रुपये) की समझौता राशि तय हुई। इसके अतिरिक्त विभिन्न फाइनेंस कंपनियों के स्तर पर कुल 5,06,915 मामलों का निस्तारण हुआ।

जनपद मुख्यालय तथा तहसील स्तर पर आयोजित इस राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 6,76,335 वादों का ऐतिहासिक निस्तारण संपन्न हुआ।

आगंतुक वादकारियों और आम जनमानस की सुविधा के लिए न्यायालय परिसर में जगह-जगह पूछताछ केंद्र स्थापित किए गए थे, जहाँ नामित अधिवक्ता और पराविधिक स्वयंसेवक सहायता हेतु मुस्तैद रहे।

परिसर में वादकारियों व अधिवक्ताओं की चहल-पहल के बीच सुरक्षा एवं शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात रहा।

बैंक व मोबाइल कंपनियों से संबंधित मामलों के त्वरित समाधान हेतु विशेष सम्बद्ध पीठों ने प्रभावी भूमिका निभाई।

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विवेक कुमार जैन
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