आगरा न्यायालय के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट माननीय शारिब अली द्वारा राज्य बनाम रवि यादव प्रकरण में एक विस्तृत और महत्वपूर्ण आदेश पारित किया गया है।
यह मामला मूल रूप से भारतीय न्याय संहिता की धारा 106 (1) के तहत दुर्घटना के रूप में प्रारम्भ हुआ था, जिसे बाद में हत्या से संबंधित धाराओं अर्थात 103 (1) एवं 61 (2) बी०एन०एस० में परिवर्तित किया गया।
वादी अब्दुल अली द्वारा दी गई प्रथम सूचना रिपोर्ट के अनुसार, मृतक असगर अली की ट्रांसपोर्ट कंपनी की गाड़ी को सचल दल के अधिकारियों द्वारा रुकवाया गया था और बाद में संदिग्ध परिस्थितियों में असगर अली का शव गोदाम के पास मिला था।
वादी पक्ष द्वारा पूर्व में राज्यकर अधिकारियों के विरुद्ध की गई विभिन्न शिकायतों और उसके आधार पर रंजिश व दबाव बनाए जाने के गंभीर आरोप लगाए गए थे।
विवेचना के पश्चात पुलिस द्वारा अभियुक्त रवि यादव के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया गया था।
अभियुक्त रवि यादव की ओर से न्यायालय में आरोप पत्र पर आपत्ति प्रस्तुत करते हुए अग्रेतर विवेचना कराए जाने हेतु एक प्रार्थना पत्र मय पेन ड्राइव प्रस्तुत किया गया।
प्रार्थी का मुख्य कथन था कि विवेचना निष्पक्ष रूप से नहीं की गई है और वास्तविक तथ्यों तथा महत्वपूर्ण साक्ष्यों को नजरअंदाज किया गया है।
प्रार्थी के अनुसार घटना में प्रयुक्त बताए गए वाहन का स्वामित्व और वास्तविक कब्जा अन्य व्यक्तियों के पास था और घटना के समय वह न तो वाहन का स्वामी था और न ही चालक था।
Also Read – दहेज हत्या एवं अन्य आरोपों से पति, सास, ससुर और देवर बरी

इसके अतिरिक्त, प्रार्थी द्वारा एक पेन ड्राइव प्रस्तुत की गई जिसमें सिग्नल ऐप के माध्यम से हुई बातचीत का वीडियो रिकॉर्डिंग और उसका लिखित ट्रांसक्रिप्ट शामिल था। इस इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य में वाहन संचालन, न्यायालय में नाम लेने और अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा का उल्लेख मिलता है।
न्यायालय ने पत्रावली पर उपलब्ध समस्त साक्ष्यों, प्रथम सूचना रिपोर्ट, केस डायरी, सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का गहन अवलोकन किया।
माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा प्रतिपादित विधि व्यवस्थाओं, जैसे कि सुधीर भास्करराव ताम्बे बनाम हेमंत यशवंत धागे तथा साकिरी वासु बनाम उत्तर प्रदेश राज्य के सिद्धांतों के प्रकाश में न्यायालय ने यह माना कि यदि किसी प्रकरण में उचित विवेचना नहीं की गई है, तो मजिस्ट्रेट निष्पक्ष विवेचना सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक निर्देश दे सकता है।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि आरोप पत्र दाखिल हो जाने के बावजूद यदि कोई महत्वपूर्ण तथ्य, साक्ष्य अथवा कोण परीक्षण से छूट गया है, तो विधि के अनुसार अग्रेतर विवेचना कराई जानी न्यायहित में आवश्यक है।
इसका उद्देश्य किसी को अनावश्यक रूप से अभियुक्त बनाना या बचाना नहीं, बल्कि निष्पक्ष एवं वैज्ञानिक परीक्षण के माध्यम से वास्तविक तथ्यों को सामने लाना है।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट माननीय शारिब अली आगरा द्वारा अभियुक्त रवि यादव के प्रार्थना पत्र को स्वीकार करते हुए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 193(9) के अंतर्गत अग्रिम विवेचना के आदेश दिए गए हैं।
पुलिस आयुक्त, कमिश्नरेट आगरा से अपेक्षा की गई है कि वे इस अग्रेतर विवेचना का प्रभावी पर्यवेक्षण स्वयं अथवा किसी वरिष्ठ राजपत्रित अधिकारी के माध्यम से सुनिश्चित कराएं। विवेचना के दौरान आवश्यक बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिए जाने के निर्देश दिए गए हैं।
जैसे घटनास्थल के आसपास स्थित वी.डी. ज्वैलर्स, एम.के. शूज़ तथा अन्य संबंधित प्रतिष्ठानों के सीसीटीवी कैमरों की मूल फुटेज का संकलन और विधिवत वैज्ञानिक परीक्षण किया जाना।
Also Read – 40 किलोग्राम अवैध गांजा बरामदगी मामले में आरोपी इरफान सलमानी की जमानत स्वीकृत
वाहन संख्या यूपी -92-ए एम -4170 के वर्तमान एवं पूर्व स्वामित्व, हस्तांतरण दस्तावेजों तथा घटना के समय उसके वास्तविक कब्जे व उपयोग की स्वतंत्र पुष्टि करना।
मृतक और संबंधित अधिकारियों के मध्य पूर्व की रंजिश की प्रकृति तथा घटना से उसके संभावित संबंधों की निष्पक्ष विवेचना करना, साथ ही मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड और लोकेशन का तकनीकी परीक्षण कराना।
सिग्नल ऐप रिकॉर्डिंग वाली पेन ड्राइव की चेन ऑफ कस्टडी, सोर्स, मेटाडेटा और फाइल इंटीग्रिटी का साइबर/फॉरेंसिक परीक्षण कराना तथा आवाज का वैज्ञानिक संस्था से मिलान परीक्षण कराना।
वाहन के वर्तमान मालिक तथा प्रथम सूचना रिपोर्ट में नामित अन्य व्यक्तियों के बयान विधिवत दर्ज करना।
इस आदेश की प्रति पुलिस आयुक्त, कमिश्नरेट आगरा को अनुपालनार्थ प्रेषित की गई है तथा पत्रावली की अगली सुनवाई की तिथि बाईस सितम्बर नियत की गई है।
Stay Updated With Latest News Join Our WhatsApp – Group Bulletin & Channel Bulletin
- न्यायालय सीजेएम आगरा का महत्वपूर्ण विधिक निर्णय: राज्य बनाम रवि यादव प्रकरण में अग्रेतर विवेचना के आदेश - September 11, 2026
- दहेज हत्या एवं अन्य आरोपों से पति, सास, ससुर और देवर बरी - September 11, 2026
- 40 किलोग्राम अवैध गांजा बरामदगी मामले में आरोपी इरफान सलमानी की जमानत स्वीकृत - September 11, 2026




