आगरा।
विशेष न्यायालय (पॉक्सो एक्ट) की न्यायाधीश माननीय सोनिका चौधरी ने पांच वर्ष की मासूम बालिका के साथ दुष्कर्म के प्रयास के मामले में अभियुक्त पवित्र उर्फ पम्मी को दोषी करार देते हुए सात वर्ष के कठोर कारावास और 25 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
न्यायालय ने अर्थदंड की पूरी धनराशि पीड़िता को देने तथा उसे यथोचित प्रतिकर दिलाने के लिए आदेश की प्रति जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को भेजने के निर्देश भी दिए हैं।
थाना जगदीशपुरा में दर्ज मामले के अनुसार, 18 मई 2025 की सुबह करीब नौ बजे वादिया की पांच वर्षीया पुत्री कॉलोनी स्थित मंदिर में खेलने गई थी।
उसी दौरान अभियुक्त ने बालिका को दबोचकर उसके साथ दुराचार का प्रयास किया। पीड़िता द्वारा किसी तरह चंगुल से छूटकर भागने का प्रयास करने पर अभियुक्त ने उसे दोबारा पकड़ लिया।
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बालिका की चीख-पुकार सुनकर मंदिर की सेविका और पीड़िता की दादी मौके पर पहुंचीं, जिन्हें देखकर अभियुक्त वहां से फरार हो गया। अभियुक्त का यह कृत्य मंदिर में लगे सीसीटीवी कैमरे में भी कैद हो गया था।
तहरीर के आधार पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर अभियुक्त को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
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अदालत में अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता सुभाष गिरि, विशेष लोक अभियोजक विजय किशन लवानियां एवं वादी के अधिवक्ता विमल पाल सिंह बघेल ने वादिया और पीड़िता सहित कुल आठ गवाह पेश किए।
अदालत ने पीड़िता के बयान तथा सीसीटीवी फुटेज जैसे पुख्ता डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर अभियुक्त को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई।
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