आगरा/प्रयागराज।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हथियारों के लाइसेंस और उनके उपयोग को लेकर एक महत्वपूर्ण विधिक फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि शस्त्र लाइसेंस प्राप्त करना कोई सामान्य अधिकार नहीं बल्कि एक विशेष अधिकार है।
लाइसेंसी हथियार का उपयोग शादी-विवाह या धार्मिक आयोजनों में खुशी जाहिर करने के नाम पर हर्ष फायरिंग के लिए नहीं किया जा सकता है। यदि कोई ऐसा करता है, तो इसे शस्त्र लाइसेंस की शर्तों का सीधा उल्लंघन माना जाएगा।
Also Read – बालिग महिलाओं के धर्म परिवर्तन और पसंद की शादी पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त, 6 अगस्त को पेश करने का आदेश

जस्टिस सौरभ श्याम शमशेरी की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि प्रत्येक लाइसेंस धारक का यह कानूनी कर्तव्य है कि वह खरीदे गए और इस्तेमाल किए गए सभी कारतूसों का पूरा और सटीक रिकॉर्ड रखे।
अदालत ने यह आदेश याचिकाकर्ता अखिलेश कुमार की याचिका को खारिज करते हुए दिया। याचिकाकर्ता ने प्रशासन द्वारा अपना शस्त्र लाइसेंस रद्द किए जाने के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
गौरतलब है कि प्रशासन ने याचिकाकर्ता द्वारा खरीदे गए कुल 857 कारतूसों में से 757 कारतूसों का स्पष्ट हिसाब न दे पाने के कारण उसका लाइसेंस रद्द कर दिया था।
हाईकोर्ट ने प्रशासन की कार्रवाई को विधि सम्मत मानते हुए याचिकाकर्ता की अपील को निरस्त कर दिया है।
Stay Updated With Latest News Join Our WhatsApp – Channel Bulletin & Group Bulletin
- नोएडा मजदूर आंदोलन में पत्रकार पर एनएसए लगाने का मामला, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केंद्र, राज्य सरकार और डीएम-सीपी से मांगा जवाब - September 17, 2026
- गाजीपुर में हुए कमलेश बिंद एनकाउंटर की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर हाईकोर्ट में याचिका, सीबीआई जांच का अनुरोध - September 17, 2026
- इलाहाबाद हाईकोर्ट: फर्जी वसीयत और संपत्ति विवाद मामले में अभिनेता चंद्रचूड़ सिंह के चचेरे भाई की गिरफ्तारी पर रोक - September 12, 2026





