आगरा।
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग-प्रथम, आगरा ने बीमा धारक को गुमराह करने और फ्री लुक पीरियड के भीतर पॉलिसी रद्द कराने के बावजूद प्रीमियम की रकम वापस न करने को सेवा में गंभीर कमी करार दिया है।
आयोग के अध्यक्ष माननीय सर्वेश कुमार और सदस्य राजीव सिंह की पीठ ने मैक्स लाइफ इंश्योरेंस कंपनी और एक्सिस बैंक को संयुक्त एवं पृथक रूप से 2,04,500/- रुपये की पूरी प्रीमियम राशि 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया है।
इसके साथ ही मानसिक प्रताड़ना के लिए 20,000/- रुपये और वाद व्यय के रूप में 5,000/- रुपये का भुगतान करने का भी निर्देश दिया है। तय समय सीमा में भुगतान न करने पर ब्याज दर 9 प्रतिशत वार्षिक होगी।
मामला शाहगंज निवासी डॉ. ध्रुव दत्त पाठक और उनके दो नाबालिग बेटों ईशान दत्त पाठक व इष्ट दत्त पाठक से जुड़ा है। परिवादी ने अपने दोनों बेटों के भविष्य और शिक्षा के लिए एक्सिस बैंक की शाहगंज शाखा के जरिए मैक्स लाइफ इंश्योरेंस की दो पॉलिसियां ली थीं।
प्रत्येक पॉलिसी का वार्षिक प्रीमियम 51,125/- रुपये था और परिवादी ने कुल 1,02,250/- रुपये का भुगतान किया था।
आरोप था कि बैंक और बीमा कंपनी के कर्मचारियों ने 15 वर्ष के प्रीमियम भुगतान के बाद अक्टूबर 2032 में परिपक्वता का भरोसा दिया था।
हालांकि, जब नवंबर 2018 में पॉलिसी दस्तावेज मिले, तो पता चला कि भुगतान की अंतिम तिथि वर्ष 2091 है और पहला पुनर्भुगतान वर्ष 2077 में शुरू होना था, जब बच्चों की उम्र 61 वर्ष हो जाएगी।

शर्तों से असंतुष्ट होकर परिवादी ने निर्धारित फ्री लुक पीरियड के भीतर 12 नवंबर 2018 को पॉलिसी निरस्तीकरण का आवेदन एक्सिस बैंक को सौंप दिया।
बैंक ने संशोधन का आश्वासन दिया, लेकिन सुधार करने के बजाय अक्टूबर 2019 में ईसीएस के जरिए उनके खाते से दूसरी किस्त के 1,02,250/- रुपये भी काट लिए।
इसके बाद भी जब कुल जमा 2,04,500/- रुपये नहीं लौटाए गए, तब पीड़ित ने उपभोक्ता आयोग की शरण ली।
बीमा कंपनी ने तर्क दिया कि फ्री लुक पीरियड बीत जाने के बाद निरस्तीकरण की मांग की गई थी, इसलिए शर्तों के तहत राशि जब्त कर ली गई। वहीं एक्सिस बैंक ने खुद को केवल चैनल पार्टनर बताते हुए पल्ला झाड़ने का प्रयास किया।
आयोग ने पत्रावली और वर्ष 2018 के कैलेंडर का बारीकी से परीक्षण किया। अदालत ने पाया कि 26 अक्टूबर 2018 को पॉलिसी दस्तावेज प्राप्त हुए थे।
इसके बाद नवंबर में दीपावली, गोवर्धन पूजा, भैया दूज, द्वितीय शनिवार और रविवार के सार्वजनिक अवकाश पड़े। इन छुट्टियों को जोड़ने पर 15 दिनों की फ्री लुक अवधि 15 नवंबर 2018 को समाप्त हो रही थी, जबकि परिवादी ने 12 नवंबर को ही निरस्तीकरण की अर्जी बैंक को दे दी थी।
आयोग ने स्पष्ट किया कि समय रहते सूचना मिलने के बावजूद दूसरी किस्त काटना और पूरी राशि जब्त करना अनुचित व्यापारिक आचरण और सेवा में घोर कमी है।
आयोग ने विपक्षियों को 15 दिनों के भीतर पूरी धनराशि 12 नवंबर 2019 से वास्तविक भुगतान तक 6 प्रतिशत ब्याज सहित आयोग के खाते में डिमांड ड्राफ्ट से जमा करने का सख्त आदेश सुनाया। तय अवधि में विफलता पर ब्याज दर 9 प्रतिशत देय होगी।
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