आगरा:
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग-प्रथम, आगरा ने कार एक्सचेंज ऑफर के नाम पर ग्राहक की पुरानी गाड़ी और बुकिंग राशि लेने के बाद भी नई कार न देने के मामले को सेवा में गंभीर कमी माना है।
आयोग के अध्यक्ष माननीय सर्वेश कुमार एवं सदस्य राजीव सिंह की पीठ द्वारा दिए गए कड़े फैसले और निष्पादन कार्यवाही के उपरांत प्रतिपक्षी ऑटो डीलर को ₹1,54,216/- का भुगतान करना पड़ा, जिसका एकाउंट पेयी चेक राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से परिवादी को सौंप दिया गया।
मामले के अनुसार कालिन्दी विहार, रामबाग निवासी परिवादी लायक सिंह वर्मा ने अधिवक्ता हरेन्द्र पाल सिंह निषाद के माध्यम से अशोक ऑटो सेल्स लि. नुनिहाई, आगरा के विरुद्ध उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा 35 के तहत परिवाद दाखिल किया था।
परिवादी के अनुसार, उन्होंने 16 फरवरी 2023 को नई ‘टाटा टिगोर सीएनजी’ कार खरीदने के लिए डीलर से संपर्क किया था।
एक्सचेंज ऑफर के तहत उन्होंने अपनी पुरानी टाटा सफारी गाड़ी डीलर को सुपुर्द कर दी, जिसका मूल्य और बोनस कुल मिलाकर ₹1,05,000/- तय हुआ था।

इसके साथ ही उन्होंने ₹10,000/- की बुकिंग राशि भी जमा कराई थी। तय समझौते के अनुसार डीलर को दो माह के भीतर पुरानी कार का नामांतरण करवाकर नई कार की डिलीवरी देनी थी।
आरोप था कि प्रतिपक्षीगण ने न तो नई गाड़ी दी, न ही पुरानी गाड़ी का नाम ट्रांसफर कराया और बीमा समाप्त होने के बावजूद उसका अनुचित प्रयोग करते रहे।
सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के तर्कों व रसीदों के आधार पर उपभोक्ता आयोग ने पाया कि प्रतिपक्षीगण द्वारा कुल ₹1,15,000/- की राशि व वाहन लेने के बावजूद डिलीवरी न देना सेवा में स्पष्ट कमी है।
आयोग ने परिवादी के पक्ष में निर्णय देते हुए डीलर को निर्देशित किया कि वह पुरानी गाड़ी के मूल्य, बोनस और बुकिंग राशि सहित ₹1,15,000/- छह प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज के साथ वापस करे। इसके अलावा मानसिक क्षतिपूर्ति के लिए ₹10,000/- और वाद व्यय के रूप में ₹5,000/- अदा करने का आदेश दिया गया।
आदेश के अनुपालन में निष्पादन वाद (प्रकीर्ण वाद संख्या 19/2026) के दौरान निर्णीत ऋणी (अशोक ऑटो सेल्स) द्वारा संपूर्ण देय धनराशि ₹1,54,216/- आयोग के खाते में जमा कराई गई।
इसके बाद राष्ट्रीय लोक अदालत में आयोग के निर्देश पर परिवादी को पंजाब नेशनल बैंक के एकाउंट पेयी चेक के माध्यम से पूरी धनराशि का भुगतान कराकर वाद का पूर्ण निस्तारण कर दिया गया।
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