आगरा/प्रयागराज।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नोएडा के फेज-2 औद्योगिक क्षेत्र में हुए मजदूर आंदोलन और हिंसा के मामले में जेल में बंद पत्रकार एवं लेखक सत्यम वर्मा पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत की गई निरोधात्मक कार्रवाई (प्रिवेंटिव डिटेंशन) पर कड़ा संज्ञान लिया है।
अदालत ने इस संबंध में दाखिल बंदी प्रत्यक्षीकरण (हेबियस कॉर्पस) याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश राज्य सरकार, नोएडा के जिलाधिकारी (डीएम) और पुलिस कमिश्नर को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में जवाब तलब किया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति अचल सचदेव की खंडपीठ ने सत्यम वर्मा की याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई के बाद पारित किया।
अदालत ने प्रतिवादियों को अपना पक्ष रखने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है, साथ ही यह भी निर्देश दिया है कि प्रतिवादियों के जवाब आने के बाद याची एक सप्ताह के भीतर अपना प्रत्युत्तर हलफनामा (रिजाइंडर एफिडेविट) दाखिल कर सकता है।

मामले की पृष्ठभूमि के अनुसार, नोएडा के फेज-2 औद्योगिक क्षेत्र में 13 अप्रैल को मजदूर आंदोलन और उसके बाद कथित तौर पर हिंसा की घटना घटी थी।
इस प्रकरण में पुलिस-प्रशासन ने पत्रकार एवं लेखक सत्यम वर्मा की कथित संलिप्तता का आरोप लगाते हुए उन्हें हिरासत में लिया था और बाद में उनके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत निरोधात्मक आदेश पारित कर दिया था।
याची सत्यम वर्मा ने अपनी याचिका में एनएसए के तहत पारित निरोध आदेश और उसके बाद के सभी संबंधित आदेशों को विधि विरुद्ध बताते हुए उन्हें रद्द करने तथा स्वयं की रिहाई की मांग की है। मामले की अगली सुनवाई के लिए अदालत ने सात अक्टूबर की तारीख तय की है।
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