आगरा/प्रयागराज।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वर्ष 1993 के आर्म्स एक्ट से जुड़े एक पुराने मामले में खालिस्तान कमांडो फोर्स (केसीएफ) के गुर्गे सुखविंदर सिंह ढिल्लो को जमानत दे दी है।
यह आदेश न्यायमूर्ति कृष्ण पहल की एकल पीठ ने मामले के तथ्यों और साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद पारित किया।
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि प्रथम दृष्टया पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों से यह प्रतीत होता है कि अभियुक्त ने पूर्व में मिली स्वतंत्रता का दुरुपयोग नहीं किया है और न ही वह कानून की प्रक्रिया से जानबूझकर फरार हुआ था।
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इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए न्यायालय ने अभियुक्त को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।
मामले की पृष्ठभूमि के अनुसार, सुखविंदर सिंह ढिल्लो के खिलाफ वर्ष 1993 में नोएडा में आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।
जेल से रिहा होने के बाद अगस्त 1995 से वह अदालत में उपस्थित नहीं हुआ, जिसके बाद उसे फरार घोषित कर उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया गया था।
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लगभग 31 साल बाद 18 फरवरी को उत्तर प्रदेश एटीएस और नोएडा पुलिस ने एक संयुक्त कार्रवाई के तहत उसे पंजाब से गिरफ्तार किया था।
अभियुक्त सुखविंदर सिंह ढिल्लो मूल रूप से पंजाब के कपूरथला का निवासी है और उसके खिलाफ पंजाब में भी कई पुराने आपराधिक मामले दर्ज हैं।
हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद उसे संबंधित मामले में कानूनी राहत मिल गई है।
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