आगरा/प्रयागराज।
कानपुर के चर्चित अवैध किडनी ट्रांसप्लांट मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से आहूजा अस्पताल के संचालकों को बड़ी राहत मिली है।
अदालत ने अस्पताल के संचालक डॉ. सुरजीत सिंह आहूजा और उनकी पत्नी डॉ. प्रीति आहूजा की जमानत याचिका मंजूर करते हुए उन्हें रिहा करने का आदेश दिया है।
यह आदेश जस्टिस विवेक वर्मा की एकल पीठ ने मामले के सभी पक्षों को सुनने के पश्चात पारित किया।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में पक्ष रखते हुए अधिवक्ता ने दलील दी कि उनके मुवक्किलों को इस मामले में पूरी तरह से झूठा फंसाया गया है।
बचाव पक्ष ने स्पष्ट किया कि आहूजा अस्पताल में ऐसा कोई भी किडनी ट्रांसप्लांट नहीं किया गया था, जैसा कि पुलिस द्वारा आरोप लगाया जा रहा है।

अधिवक्ता ने यह भी तर्क दिया कि पुलिस की केस डायरी में ऐसा कोई भी चिकित्सीय प्रमाण या अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट शामिल नहीं है, जिससे यह सिद्ध हो सके कि अस्पताल में कोई अवैध प्रत्यारोपण हुआ था।
इसके अलावा अदालत को बताया गया कि दोनों आवेदक 31 मार्च से जेल में बंद हैं और उनका पूर्व का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है।
गौरतलब है कि कानपुर पुलिस ने रावतपुर स्थित आहूजा अस्पताल में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का भंडाफोड़ करने का दावा किया था।
इस मामले में पुलिस ने 31 मार्च को रावतपुर थाने में मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम की धारा 18, 19 व 20 तथा भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की गंभीर धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी।
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पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए डॉक्टर दंपति सहित करीब एक दर्जन लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
अदालत ने बचाव पक्ष की दलीलों, चिकित्सीय साक्ष्यों के अभाव और आवेदकों के स्वच्छ आपराधिक इतिहास को ध्यान में रखते हुए डॉक्टर दंपति को जमानत का लाभ प्रदान किया है।
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