आगरा जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग प्रथम ने सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार का एक महत्वपूर्ण मामला तय करते हुए उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाया है।
मामला उत्तर प्रदेश विशेष सुरक्षा बल में तैनात हितेन्द्र सिंह से जुड़ा है, जिन्होंने मोटोरोला मोबिलिटी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की ओर से निर्मित मोबाइल फोन खरीदा था।
परिवादी हितेन्द्र सिंह ने गत वर्ष मई माह में डीलर से लगभग इक्कीस हजार चार सौ रुपये का मोटोरोला मोबाइल फोन खरीदा था, जिस पर एक वर्ष की वारंटी दी गई थी।
कुछ समय बाद फोन में खराबी आने पर जब वह सर्विस सेंटर गए, तो वहां कर्मियों ने इस मॉडल में कमी होने की बात कही।
इसके कुछ दिन बाद फोन पूरी तरह बंद हो गया और सर्विस सेंटर द्वारा इसे ठीक करने के एवज में भारी भरकम राशि का एस्टीमेट थमा दिया गया, जबकि फोन वारंटी अवधि के भीतर था।

कंपनी और डीलर की ओर से कोई भी पक्षकार आयोग के समक्ष उपस्थित नहीं हुआ, जिसके बाद आयोग ने एकपक्षीय कार्रवाई की।
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष माननीय सर्वेश कुमार और सदस्य राजीव सिंह की पीठ ने पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद पाया कि वारंटी अवधि के अंदर मोबाइल खराब होने पर उसे मुफ्त ठीक करना या बदलना निर्माता कंपनी और सेवा प्रदाता की जिम्मेदारी थी।
आयोग ने परिवादी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए प्रतिपक्षी कंपनियों को आदेश दिया है कि वे पैंतालीस दिन के भीतर मोबाइल के क्रय मूल्य इक्कीस हजार चार सौ रुपये छह प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज सहित वापस करें।
इसके अलावा मानसिक पीड़ा और क्षतिपूर्ति के रूप में दस हजार रुपये तथा वाद व्यय के रूप में पांच हजार रुपये की धनराशि भी आयोग के खाते में जमा करने के निर्देश दिए गए हैं।
यदि तय समय सीमा के भीतर भुगतान नहीं किया जाता है, तो ब्याज की दर बढ़ाकर नौ प्रतिशत वार्षिक कर दी जाएगी।इसके बाद ₹21,400/- का डीडी और ₹7,000/- कंपनी द्वारा आयोग में जमा करा दिए गए जिन्हे आयोग के अध्यक्ष माननीय सर्वेश कुमार और सदस्य राजीव सिंह में परिवादी हितेन्द्र सिंह को सौंप दिया ।
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