आगरा/प्रयागराज ।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए मुख्तार अंसारी के चचेरे भाई मंसूर अंसारी की संपत्तियों की कुर्की को रद्द कर दिया है।
न्यायमूर्ति राजबीर सिंह की एकल पीठ ने जिलाधिकारी (DM) गाजीपुर द्वारा गैंगस्टर एक्ट के तहत की गई कार्रवाई को अवैध पाते हुए कुर्क की गई 23 दुकानों को तत्काल रिलीज करने का निर्देश दिया है।
निचली अदालत का आदेश निरस्त:
हाईकोर्ट ने न केवल जिलाधिकारी के आदेश को पलटा, बल्कि एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट, गाजीपुर के उस आदेश को भी रद्द कर दिया है जिसमें डीएम की कुर्की की कार्रवाई को सही ठहराया गया था। अदालत ने माना कि निचली अदालत ने संपत्तियों के अर्जन के स्रोतों पर विचार करने में विधिक त्रुटि की।
मामले की पृष्ठभूमि (Background):
* कुर्की की कार्रवाई: गाजीपुर के जिलाधिकारी ने गैंगस्टर एक्ट की धारा 14(1) के तहत मोहम्मदाबाद स्थित मंसूर अंसारी की 23 दुकानों को अपराध से अर्जित संपत्ति मानते हुए कुर्क करने का आदेश जारी किया था।

* याची का तर्क: मंसूर अंसारी के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि ये संपत्तियां वैध आय के स्रोतों से बनाई गई थीं और इनका किसी आपराधिक गतिविधि या गैंगस्टर चार्ट से कोई संबंध नहीं है।
* फैसला सुरक्षित: कोर्ट ने इस मामले में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 17 फरवरी को अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया था।
अदालत का विधिक निष्कर्ष:
न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि संबंधित 23 संपत्तियों को ‘गैंगस्टर गतिविधियों’ से अर्जित नहीं माना जा सकता। साक्ष्यों के अभाव में जिलाधिकारी का कुर्की आदेश कानूनन टिकने योग्य नहीं था।
कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए प्रशासन को निर्देशित किया कि इन संपत्तियों को मुक्त कर याची को वापस सौंपा जाए।
यह आदेश स्पष्ट करता है कि गैंगस्टर एक्ट के तहत संपत्ति कुर्की के लिए यह सिद्ध करना आवश्यक है कि संपत्ति प्रत्यक्ष रूप से अपराध के जरिए बनाई गई है, केवल आरोपी से संबंध होना कुर्की का पर्याप्त आधार नहीं है।
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