आगरा/प्रयागराज ।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शादी का झूठा वादा कर शारीरिक संबंध बनाने, अवैध रूप से बंधक बनाने और धमकाने के आरोपियों कृष्ण दत्त उर्फ मुख्या तथा शिवकांत उर्फ श्याम को बड़ी राहत दी है।
न्यायमूर्ति राजीव मिश्रा और न्यायमूर्ति लक्ष्मीकांत शुक्ल की खंडपीठ ने याचियों की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले की विवेचना (Investigation) तो जारी रहेगी, लेकिन पुलिस अगली सुनवाई तक अंतिम रिपोर्ट पेश नहीं करेगी।
एफआईआर में देरी पर उठाए सवाल:
याचियों के अधिवक्ता वी.के. चंदेल और मयंक कृष्ण सिंह चंदेल ने दलील दी कि मामले में एफआईआर दर्ज कराने में चार महीने की अत्यधिक देरी की गई है।
घटना 1 अप्रैल 2025 की बताई गई है, जबकि रिपोर्ट 8 अगस्त 2025 को बांदा जिले के मारका थाना क्षेत्र में दर्ज कराई गई। बचाव पक्ष का कहना है कि इस देरी का कोई ठोस कारण नहीं बताया गया, जिससे आरोपों की सत्यता संदिग्ध प्रतीत होती है।

साक्ष्यों की कमी और कानूनी पक्ष:
अधिवक्ताओं ने कोर्ट के समक्ष तर्क दिया कि एफआईआर में लगाए गए आरोप ऐसे हैं जिन्हें केवल मौखिक बयानों के आधार पर साबित नहीं किया जा सकता और इनके पक्ष में कोई पुख्ता वैज्ञानिक या स्वतंत्र साक्ष्य मौजूद नहीं है।
कोर्ट ने इन दलीलों को विचारणीय मानते हुए राज्य सरकार और शिकायतकर्ता को नोटिस जारी कर छह हफ्ते में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
मामले की अगली कार्यवाही:
हाईकोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 28 अप्रैल की तिथि निर्धारित की है। तब तक के लिए आरोपियों को गिरफ्तारी से संरक्षण प्रदान किया गया है, बशर्ते वे विवेचना में पूर्ण सहयोग करें।
मुख्य बिंदु:
* मामला: धारा 376 (पुराने कानून के अनुसार) व अन्य संबंधित धाराओं के तहत दर्ज एफआईआर।
* स्थान: मारका थाना, जनपद बांदा।
* न्यायालय का रुख: गिरफ्तारी पर रोक, किंतु विवेचना जारी रखने का निर्देश।
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