आगरा ।
आगरा की एक स्थानीय अदालत ने उत्तर प्रदेश गोहत्या निवारण अधिनियम के तहत आरोपित दो युवकों को साक्ष्य के अभाव में बरी करने का आदेश दिया है।
अपर जिला जज (संख्या 10) माननीय काशी नाथ की अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए पाया कि पुलिस द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के बयानों में गंभीर कमियां हैं।
प्रकरण का संक्षिप्त विवरण:
अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह मामला 19 नवंबर 2021 का है। थाना ताजगंज में तैनात उपनिरीक्षक जितेंद्र सिंह ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि गश्त के दौरान मुखबिर से सूचना मिली थी कि कुछ लोग पिकअप वैन में गाय लादकर गोकशी के उद्देश्य से इनर रिंग रोड होकर ग्राम गुतिला की ओर जा रहे हैं।
पुलिस ने घेराबंदी कर पिकअप वैन को रोका, जिससे एक व्यक्ति कूदकर फरार हो गया। पुलिस ने मौके से चालक मुकेश को एक जीवित गाय, चाकू और रस्सियों के साथ गिरफ्तार किया था।
पूछताछ में मुकेश ने फरार साथी का नाम सोनू उर्फ रियाजुद्दीन बताया था, जिसे पुलिस ने घटना के तीन वर्ष बाद गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की थी।
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न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत तर्क:
मामले की सुनवाई के दौरान आरोपियों के अधिवक्ता विमल बघेल, आकाश कुशवाहा और पवन बघेल ने पुलिस की कहानी पर सवाल उठाए।
बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि पुलिस ने किसी भी स्वतंत्र गवाह को जांच में शामिल नहीं किया। इसके अतिरिक्त, बरामद किए गए माल को न्यायालय के समक्ष पेश नहीं किया गया और न ही बरामद गाय के शारीरिक विवरण (जैसे सींग और पूंछ की लंबाई) का कोई स्पष्ट उल्लेख रिकॉर्ड में किया गया।
दोषमुक्ति का आधार:
अदालत ने अपने निर्णय में उल्लेख किया कि वादी मुकदमा सहित अन्य पुलिस गवाहों के बयानों में परस्पर विरोधाभास है।
स्वतंत्र साक्ष्यों की अनुपस्थिति और बरामदगी की प्रक्रिया में तकनीकी खामियों को देखते हुए अदालत ने संदेह का लाभ आरोपियों को दिया।
एडीजे माननीय काशी नाथ ने मुकेश और सोनू उर्फ रियाजुद्दीन को गोहत्या निवारण अधिनियम के आरोपों से बरी करने का आदेश जारी किया।
मुख्य विवरण:
* न्यायालय: अपर जिला जज 10, आगरा
* आरोपी: मुकेश और सोनू उर्फ रियाजुद्दीन (निवासी ताजगंज)
* आरोप: उत्तर प्रदेश गोहत्या निवारण अधिनियम
* निर्णय: साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त
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