आगरा/प्रयागराज:
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में ‘रवानी’ (Rawani) जाति को ‘कहार’ जाति से अलग कर एक स्वतंत्र पहचान दिए जाने की मांग वाली याचिका पर कड़ा रुख अपनाया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायालय ने केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर 4 सप्ताह के भीतर अपना विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
मामले की मुख्य बिंदु:
* याचिकाकर्ता: यह याचिका ‘उत्तर प्रदेश चंद्रवंशी रवानी जनकल्याण सभा’, लखनऊ के अध्यक्ष राज नारायण सिंह चंद्रवंशी की ओर से दाखिल की गई है।
* मुख्य मांग: याची का तर्क है कि ‘रवानी’ समुदाय की अपनी एक विशिष्ट सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान है, जिसे वर्तमान में ‘कहार’ जाति के साथ जोड़कर देखा जाता है। याचिका में मांग की गई है कि इस विसंगति को दूर कर रवानी समुदाय को स्वतंत्र पहचान दी जाए।
* न्यायिक पीठ: इस मामले की सुनवाई जस्टिस अरिंदम सिन्हा और जस्टिस सत्यवीर सिंह की डिवीजन बेंच द्वारा की गई।
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* कानूनी पैरवी: याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता राकेश कुमार गुप्ता ने पक्ष रखा और समुदाय की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि व स्वतंत्र पहचान की आवश्यकता पर दलीलें पेश कीं।
कोर्ट का आदेश और अगली कार्यवाही:
न्यायालय ने सुनवाई के दौरान सरकारों को जवाब के लिए समय देते हुए स्पष्ट किया कि:
* केंद्र व राज्य सरकार को 4 हफ्ते के भीतर हलफनामा दाखिल करना होगा।
* सरकार का जवाब आने के बाद, कोर्ट ने याची अधिवक्ता को अपना पक्ष रखने के लिए एक हफ्ते का समय रिज्वाइंडर (प्रति शपथ पत्र) दाखिल करने हेतु दिया है।
* मामले की अगली सुनवाई 11 मई को ‘फ्रेश केस’ के तौर पर सूचीबद्ध की गई है।
विधिक टिप्पणी: यह मामला उत्तर प्रदेश के जातिगत वर्गीकरण और सामाजिक पहचान के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि न्यायालय इस मांग को स्वीकार करता है, तो यह ‘रवानी’ समुदाय के लिए आरक्षण और सरकारी योजनाओं के लाभ प्राप्त करने की दिशा में एक बड़ा बदलाव ला सकता है।
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