आगरा:
अदालत के आदेश के बावजूद मुकदमे से संबंधित माल (बरामदगी) पेश न करने पर एडीजे 13 की अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है।
अपर जिला जज (एडीजे) 13 माननीय महेश चंद वर्मा ने थानाध्यक्ष छत्ता की इस लापरवाही के कारण गवाही देने आए सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी को हुए आर्थिक नुकसान और कष्ट की भरपाई के लिए 4500/- रुपये थानाध्यक्ष के वेतन से वसूलने के आदेश दिए हैं।
क्या है पूरा मामला ?
मामला वर्ष 2017 का है, जहाँ थाना छत्ता में ‘राज्य बनाम भोलू आदि’ के विरुद्ध हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज हुआ था। इस मुकदमे में तत्कालीन थानाध्यक्ष पुष्पेंद्र पाल सिंह (जो अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं) मुख्य गवाह हैं।
* गवाही में बाधा: सेवानिवृत्त थानाध्यक्ष पुष्पेंद्र पाल सिंह गवाही देने के लिए झाँसी मुख्यालय से 90 किमी दूर अपने निवास से बस और फिर ट्रेन का सफर तय कर आगरा अदालत पहुँचे थे।
* पुलिस की लापरवाही: अदालत ने पहले ही आदेश दिया था कि संबंधित माल (बरामदगी) कोर्ट में पेश की जाए, लेकिन वर्तमान थानाध्यक्ष छत्ता द्वारा इसे प्रस्तुत नहीं किया गया। माल के अभाव में पूर्व थानाध्यक्ष की गवाही दर्ज नहीं हो सकी।
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न्यायालय का आदेश और पुलिस आयुक्त को निर्देश:
अदालत ने इसे पुलिस की कार्यप्रणाली में गंभीर चूक माना।
माननीय न्यायाधीश ने पुलिस आयुक्त, आगरा को निर्देशित किया है कि:
* जुर्माना वसूली: वर्तमान थानाध्यक्ष छत्ता से 4500/- रुपये की राशि वसूल कर अदालत में जमा कराई जाए।
* खर्च की भरपाई: यह राशि आगामी 9 अप्रैल को पुनः गवाही के लिए आने वाले सेवानिवृत्त अधिकारी पुष्पेंद्र पाल सिंह को उनके यात्रा व्यय और कष्ट की क्षतिपूर्ति के रूप में दी जाएगी।
* सख्त हिदायत: पुलिस आयुक्त यह सुनिश्चित करें कि थानाध्यक्ष छत्ता आगामी 9 अप्रैल को सुबह 10:30 बजे तक हर हाल में मुकदमे से संबंधित बरामद माल अदालत में पेश करें।
अदालत की टिप्पणी: गवाहों को अनावश्यक परेशान करना और न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डालना स्वीकार्य नहीं है। पुलिस की जिम्मेदारी है कि वह साक्ष्यों और गवाहों की उपस्थिति समय पर सुनिश्चित करे।
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