आगरा में दहेज प्रताड़ना और गर्भपात मामले में तीन आरोपियों की जमानत याचिका खारिज

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आगरा के जिला और सत्र न्यायालय में एक महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई करते हुए पीठासीन अधिकारी माननीय संजय कुमार मलिक की अदालत ने दहेज प्रताड़ना और गर्भपात से जुड़े एक गंभीर मामले में तीन आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी है।

यह मामला थाना न्यू आगरा में दर्ज प्राथमिकी संख्या 200/2026 और जमानत प्रार्थनापत्र संख्या 3853/2026 से संबंधित है।

इस मामले की पृष्ठभूमि के अनुसार, आरोपी नन्दित बंसल, उनके पिता गोविन्द बंसल और माता मीनू बंसल के विरुद्ध शिकायत दर्ज कराई गई है।

शिकायतकर्ता आस्था गुप्ता का आरोप है कि 26 नवंबर 2025 को अपनी पुत्री जान्हवी अग्रवाल बंसल का विवाह नन्दित बंसल के साथ करने के बाद से ही ससुराल पक्ष द्वारा 21 लाख रुपये और एक वाहन की अतिरिक्त दहेज के रूप में मांग की जा रही थी।

अभियोजन पक्ष और पीड़िता के अधिवक्ताओं ने न्यायालय के समक्ष तर्क प्रस्तुत किया कि शादी के तीन महीने के भीतर ही पीड़िता को शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा।

उनका आरोप है कि 15 फरवरी 2026 की रात पति, सास और ससुर द्वारा की गई मारपीट के परिणामस्वरूप पीड़िता का गर्भपात हो गया।

अभियोजन ने अपने दावों की पुष्टि के लिए मेडिकल रिपोर्ट, डॉक्टरों के बयान और केस डायरी में मौजूद वीडियो रिकॉर्डिंग का संदर्भ दिया, जिसमें घटना की रात पीड़िता को गंभीर स्थिति में देखा गया है।

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दूसरी ओर, आरोपियों ने बचाव में कहा कि उन्हें इस मामले में झूठा फंसाया गया है और यह केवल एक वैवाहिक विवाद है।

आरोपियों के अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि पीड़िता द्वारा राष्ट्रीय महिला आयोग को दी गई प्रारंभिक शिकायत में गर्भपात का उल्लेख नहीं था।

साथ ही, उन्होंने शादी के बाद पीड़िता द्वारा कुछ आभूषण प्राप्त करने संबंधी प्रपत्रों का हवाला देते हुए आरोपों को निराधार बताया।

आरोपियों को 29 जुलाई 2026 को हैदराबाद से गिरफ्तार कर ट्रांजिट रिमांड पर आगरा लाया गया था।

मामले के सभी पहलुओं पर विचार करते हुए न्यायालय ने पाया कि पीड़िता के बयानों और उपलब्ध चिकित्सा दस्तावेजों में पर्याप्त समानता है।

न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि यह अपराध महिला की गरिमा के प्रतिकूल है।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि मारपीट से गर्भपात नहीं भी हुआ होता, तब भी पीड़िता को मेडिकल सहायता उपलब्ध न कराना ससुराल पक्ष की गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।

इन निष्कर्षों के आधार पर सत्र न्यायाधीश ने तीनों आरोपियों की जमानत याचिका को निरस्त कर दिया है।

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विवेक कुमार जैन
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