साक्ष्य के अभाव में दहेज हत्या के आरोपी पति सहित सात बरी, बचाव पक्ष ने साबित किया झूठा मुकदमा

न्यायालय मुख्य सुर्खियां

आगरा।

दहेज हत्या और साक्ष्य मिटाने के एक गंभीर मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे-5) माननीय विराट कुमार श्रीवास्तव की अदालत ने अभियोजन पक्ष द्वारा पर्याप्त सुबूत पेश न कर पाने पर पति और सास-ससुर सहित सात आरोपियों को दोषमुक्त करार दिया है।

बचाव पक्ष ने अदालत में यह तर्क रखा कि मृतका की मृत्यु उसके मायके में ही हुई थी और ससुराल के गांव में किसी अन्य महिला की राख को आधार बनाकर यह मुकदमा दर्ज कराया गया था।

अभियोजन पक्ष का आरोप थाना शमशाबाद में दर्ज कराई गई एफआईआर के अनुसार, वादी रामजीलाल ने आरोप लगाया था कि उसकी पुत्री रजनी का विवाह 6 मार्च 2018 को ग्राम झारपुरा निवासी अनिल के साथ हुआ था। वादी का आरोप था कि ससुरालीजन दहेज में बुलेट मोटरसाइकिल की मांग को लेकर उसे प्रताड़ित करते थे।

मांग पूरी न होने पर 30 दिसंबर 2018 को आरोपियों ने रजनी की गला घोंटकर हत्या कर दी और साक्ष्य नष्ट करने के उद्देश्य से शव का दाह संस्कार कर दिया।

वादी का कहना था कि गांव के एक व्यक्ति से सूचना पाकर जब वे लोग वहां पहुंचे, तो उन्हें मौके पर केवल राख मिली।

इस मामले में पुलिस ने पति अनिल, सास मछला देवी, ससुर छत्तर सिंह, जेठ सोनू और मनोज, तथा जिठानी वर्षा और नीतू के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था।

बचाव पक्ष की दलीलें अदालत में आरोपियों की ओर से अधिवक्ता नीरज पाठक ने पैरवी करते हुए बचाव में कई अहम तथ्य रखे।

Also Read – आगरा दीवानी परिसर लाठीचार्ज के 25 वर्ष: मालवीय आयोग की जांच रिपोर्ट और सरकारी कार्रवाई पर आरटीआई से उठे सवाल

उन्होंने अदालत को बताया कि मृतका की शादी उसकी मर्जी के बिना हुई थी, जिससे वह खुश नहीं थी और घटना से आठ दिन पहले से वह अपने मायके में ही रह रही थी।

बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि रजनी की मृत्यु उसके मायके में ही हुई थी। ससुराल के गांव में किसी अन्य महिला की मृत्यु होने पर, वादी ने उसकी राख को अपनी पुत्री की राख बताकर झूठी एफआईआर दर्ज करा दी।

इसके अलावा, जेठ और जिठानियों को फंसाए जाने के मामले में बचाव पक्ष ने उनके अलग-अलग मकानों में रहने के प्रमाण स्वरूप ग्राम प्रधान की रिपोर्ट, बिजली के बिल और राशन कार्ड अदालत में प्रस्तुत किए।

Also Read – झूठी शिकायत और संपत्ति का दबाव बना आधार, अदालत ने 19 वर्ष पुराने विवाह को किया विच्छेद

अभियोजन की कमजोरियां और न्यायालय का निर्णय मुकदमे के विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष अपना मामला संदेह से परे साबित करने में विफल रहा।

वादी मुकदमा अदालत में उस व्यक्ति का नाम या फोन नंबर तक नहीं बता सका जिसने उसे बेटी की हत्या की कथित सूचना दी थी। मामले में विधि विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) की रिपोर्ट से भी अभियोजन की कहानी की पुष्टि नहीं हो सकी।

इसके अतिरिक्त, मृतका के भाई हरेंद्र, चाचा राजेंद्र और वह फूफा जिसने पुलिस में शिकायत लिखी थी, उन्हें गवाही के लिए अदालत में पेश ही नहीं किया गया।

इन सभी तथ्यों, महत्वपूर्ण गवाहों की अनुपस्थिति, साक्ष्यों के अभाव और बचाव पक्ष के ठोस तर्कों को स्वीकार करते हुए, एडीजे-5 की अदालत ने सभी सातों आरोपियों को आरोपों से बरी करने का आदेश दिया।

Stay Updated With Latest News Join Our WhatsApp  – Channel Bulletin & Group Bulletin

विवेक कुमार जैन
Follow me

1 thought on “साक्ष्य के अभाव में दहेज हत्या के आरोपी पति सहित सात बरी, बचाव पक्ष ने साबित किया झूठा मुकदमा”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *