बढ़े हुए क्षेत्रफल पर अतिरिक्त छूट देने का आगरा उपभोक्ता आयोग का निर्देश, आगरा विकास प्राधिकरण की दलील खारिज

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आगरा।

जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग द्वितीय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) को निर्देशित किया है कि वह आवंटी को बढ़े हुए भूखंड क्षेत्रफल पर भी दो प्रतिशत की अतिरिक्त छूट प्रदान करे।

आयोग के अध्यक्ष माननीय आशुतोष और सदस्य पारुल कौशिक की पीठ ने इस मामले में प्राधिकरण को 45 दिनों के भीतर आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करने और संपत्ति का संयुक्त माप कराकर बैनामा निष्पादित करने का आदेश दिया है।

प्रकरण के अनुसार, परिवादिनी सोनम शर्मा ने आगरा विकास प्राधिकरण की शास्त्रीपुरम योजना में एक भूखंड आवंटित कराया था। परिवादिनी ने आवंटित भूखंड की संपूर्ण धनराशि नियमानुसार जमा कर दी थी।

हालांकि, भूखंड का क्षेत्रफल मूल आवंटन से 6.60 मीटर अधिक पाया गया। परिवादिनी का तर्क था कि चूंकि उन्होंने संपूर्ण धनराशि एकमुश्त जमा की है, इसलिए बढ़े हुए अतिरिक्त क्षेत्रफल पर भी उन्हें दो प्रतिशत की छूट मिलनी चाहिए। साथ ही उन्होंने बैनामा से पूर्व संपत्ति की संयुक्त पैमाइश की मांग भी की थी।

विकास प्राधिकरण ने आयोग के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए इस मांग का विरोध किया। प्राधिकरण का तर्क था कि नियमानुसार छूट केवल एक ही बार दी जा सकती है, जो पहले ही दी जा चुकी है। प्राधिकरण के अनुसार, बढ़े हुए क्षेत्रफल पर दोबारा छूट देने का कोई विधिक प्रावधान नहीं है।

आयोग ने पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों और दोनों पक्षों के तर्कों का अनुशीलन करने के बाद प्राधिकरण की दलीलों को न्यायसंगत नहीं माना।

उपभोक्ता आयोग ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि विपक्षी प्राधिकरण बढ़े हुए क्षेत्रफल पर भी दो प्रतिशत की छूट देना सुनिश्चित करे। इसके अतिरिक्त, विवाद को समाप्त करने के लिए संपत्ति का संयुक्त माप (ज्वाइंट मेजरमेंट) कराया जाए और तत्पश्चात ही बैनामा की प्रक्रिया पूरी की जाए।

इस आदेश से उन आवंटियों को राहत मिलने की उम्मीद है जो एकमुश्त भुगतान के बावजूद बढ़े हुए क्षेत्रफल पर छूट के लाभ से वंचित रह जाते थे।

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विवेक कुमार जैन
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