आगरा/प्रयागराज।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के मदरसों की एटीएस (एंटी टेररिस्ट स्क्वाड) से जांच कराए जाने के मामले में कड़ा रुख अपनाया है।
न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि बिना किसी ठोस आधार के सिर्फ संदेह के घेरे में रखकर व्यापक जांच नहीं की जा सकती।
अदालत ने इस संबंध में राज्य सरकार और यूपी एटीएस से जवाब तलब करते हुए जांच से जुड़े सभी दस्तावेज अगली सुनवाई पर पेश करने के निर्देश दिए हैं।
यह आदेश इलाहाबाद हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने टीचर्स एसोसिएशन मदरसा अरबिया उत्तर प्रदेश की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।
याचिका में प्रदेश के करीब 4 हजार मदरसों की एटीएस जांच कराए जाने के निर्णय को चुनौती दी गई है।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने दलील दी कि अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के पास सभी मान्यता प्राप्त मदरसों का पूर्ण विवरण पहले से उपलब्ध है।
ऐसे में एटीएस जांच के नाम पर मदरसों के शिक्षकों और प्रबंधकों को बेवजह परेशान किया जा रहा है।
याचिका में तर्क दिया गया है कि एटीएस द्वारा की जा रही यह जांच मदरसा बोर्ड अधिनियम 2004 और मदरसा नियमावली 2016 के प्रावधानों के विपरीत है।
याचिकाकर्ता ने एटीएस की सक्रियता पर आपत्ति जताते हुए इसे प्रक्रियात्मक नियमों का उल्लंघन बताया है।
हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए टिप्पणी की कि किसी भी जांच के लिए ठोस आधार होना अनिवार्य है।
न्यायालय ने सरकार को निर्देशित किया है कि वह जांच की आवश्यकता और अब तक के तथ्यों के साथ अपना पक्ष रखे।
मामले की अगली सुनवाई के लिए 4 मई की तिथि निर्धारित की गई है।
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