आगरा।
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट) माननीय डॉ. दिव्यांनंद द्विवेदी ने अपहरण और दुराचार के मामले में आरोपी ललित उर्फ मुकेश को साक्ष्य के अभाव में बरी करने के आदेश दिए हैं। न्यायालय ने पाया कि मामले में पीड़िता बयान दर्ज कराने नहीं आई और अन्य गवाह भी अपने बयानों से मुकर गए।
प्रकरण के अनुसार, थाना एत्माद्दौला में 8 नवंबर 2013 को न्यायालय के आदेश पर एक महिला ने मुकदमा दर्ज कराया था। वादिनी का आरोप था कि मुस्लिम रीति-रिवाज से जितेंद्र शर्मा के साथ हुई उसकी शादी के बाद आरोपी ललित उर्फ मुकेश उसे पति के विरुद्ध भड़काता था, जिससे उसका तलाक हो गया। आरोप के मुताबिक, इसके बाद ललित उसे शादी का झांसा देकर अपने साथ भगा ले गया और उसके साथ कई बार दुराचार किया। बाद में आरोपी ने शादी से इनकार कर दिया और उसके परिजनों ने भी महिला के साथ अभद्रता कर उसे भगा दिया।
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से जय प्रकाश, प्रमोद कुमार, तत्कालीन थानाध्यक्ष व विवेचक गुरुपाल सिंह और मुख्य आरक्षी रमेश चंद की गवाही दर्ज की गई।
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हालांकि, मुकदमे की मुख्य गवाह और पीड़िता स्वयं गवाही देने के लिए न्यायालय में उपस्थित नहीं हुई। साथ ही यह तथ्य भी सामने आया कि विवेचक ने न तो पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया था और न ही मजिस्ट्रेट के समक्ष उसके बयान दर्ज कराए थे।
मामले के अन्य गवाह जय प्रकाश और प्रमोद कुमार भी न्यायालय में अपने पूर्व के बयानों से मुकर गए।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता राजकुमार कुशवाह ने तर्क दिया कि आरोपी को झूठा फंसाया गया है और उसके विरुद्ध कोई ठोस साक्ष्य मौजूद नहीं है।
न्यायालय ने पत्रावली पर उपलब्ध तथ्यों और साक्ष्यों के पूर्ण अभाव को देखते हुए नगला पृथ्वी नाथ निवासी ललित उर्फ मुकेश को दोषमुक्त करने के आदेश जारी किए।
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