आगरा।
पुलिस हिरासत में एक महिला के साथ मारपीट करने के मामले में आखिरकार थाना सिकंदरा पुलिस को अपने ही विभाग के अधीनस्थों के विरुद्ध आपराधिक मुकदमा दर्ज करने के लिए विवश होना पड़ा है।
न्यायालय के कड़े आदेश और जिला जज की अदालत से पुनर्विचार याचिका (रिवीजन) निरस्त होने के बाद पुलिस ने यह दंडात्मक कार्रवाई की है।
इस मामले में उपनिरीक्षक (एसआइ) नीलेश शर्मा, उपनिरीक्षक सुरजीत सिंह, महिला उपनिरीक्षक नेहा और महिला हेड कांस्टेबल सीमा के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज की गई है।
मामले के अनुसार, थाना सिकंदरा क्षेत्र के रुनकता की रहने वाली पीड़िता सीमा सिकरवार को पुलिस ने हिरासत में लिया था, जहां हिरासत के दौरान उक्त पुलिसकर्मियों ने उनके साथ बुरी तरह मारपीट की थी।
इस गंभीर मामले को लेकर पीड़िता के अधिवक्ता डॉक्टर अजीत कुमार सिंह ने न्यायालय में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर कानूनी कार्रवाई की मांग की थी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट माननीय बटेश्वर कुमार ने थानाध्यक्ष सिकंदरा को आरोपी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध तत्काल मुकदमा दर्ज करने के आदेश जारी किए थे।
न्यायालय का आदेश होने के बावजूद थानाध्यक्ष सिकंदरा ने अपने ही मातहतों के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं किया। इसके विपरीत, पुलिस प्रशासन ने निचले न्यायालय के इस आदेश को चुनौती देते हुए जिला जज की अदालत में एक पुनर्विचार याचिका (रिवीजन) दायर कर दी।
हालांकि, जिला जज ने इस पुनर्विचार याचिका को पोषणीय (मेंटेनेबल) न मानते हुए विगत दिनों इसे सिरे से निरस्त कर दिया। जिला अदालत से झटका लगने के बाद सिकंदरा पुलिस के पास कोई कानूनी विकल्प नहीं बचा और उन्हें मुकदमा दर्ज करने पर मजबूर होना पड़ा।
पुलिस ने चारों आरोपी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा ११५(२) (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना), ३०५(ए) (महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाना), ३४२(२) (गलत तरीके से बंधक बनाना) और ३५२ (शांति भंग करने के इरादे से अपमान करना) के तहत मुकदमा पंजीकृत कर लिया है।
न्यायालय के आदेश पर अपनों के ही खिलाफ हुई इस कार्रवाई से पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है।
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