आगरा ।
आगरा की एक विशेष अदालत ने सत्रह साल पुराने गिरोह बंद अधिनियम (गैंगस्टर एक्ट) के एक मामले में नामजद आरोपी की जमानत अर्जी को स्वीकार करते हुए उसकी रिहाई के आदेश जारी किए हैं।
विशेष न्यायाधीश (गिरोह बंद अधिनियम) ने यह आदेश आरोपी पक्ष के अधिवक्ताओं की दलीलों को सुनने के बाद दिया।
क्या है पूरा मामला:
यह मामला आगरा जिले के थाना जगदीशपुरा से जुड़ा है। वर्ष 2009 में तत्कालीन थानाध्यक्ष सुरेश वीर सिंह ने आरोपी बबलू उर्फ बल्लो उर्फ बलवीर (पुत्र रमेश, निवासी अलबतिया) के खिलाफ एक मुकदमा दर्ज कराया था।
पुलिस का आरोप था कि आरोपी अवैध रूप से धन अर्जित करने के लिए गिरोह चलाता है और इलाके में अपराध कर भय का माहौल पैदा करता है। इसी आधार पर 5 अगस्त 2009 को उसके विरुद्ध गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की गई थी।
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हाईकोर्ट की रोक और गिरफ्तारी:
मुकदमा दर्ज होने के बाद आरोपी ने अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट की शरण ली थी।
हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर होने पर अदालत ने उसकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी, जिसके कारण लंबे समय तक पुलिस उसे गिरफ्तार नहीं कर सकी।
हालांकि, हाईकोर्ट द्वारा मामले का अंतिम निस्तारण करने और आरोपी के विरुद्ध प्रतिकूल आदेश पारित करने के बाद पुलिस ने कार्रवाई की।
पुलिस ने इसी वर्ष 23 मई 2026 को आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
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अदालत का फैसला:
जेल भेजे जाने के बाद आरोपी की ओर से विशेष अदालत में जमानत प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया।
सुनवाई के दौरान आरोपी के अधिवक्ता प्रवेश सोलंकी एवं सौरभ कहरबार ने अदालत के समक्ष अपने मजबूत तर्क रखे।
विशेष न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की बहस सुनने और पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद आरोपी बबलू उर्फ बल्लो की जमानत अर्जी को मंजूर कर लिया और उसे कारागार से रिहा करने का आदेश दिया।
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