आगरा ।
आगरा की स्थाई लोक अदालत ने उपभोक्ता हितों की रक्षा करते हुए एक बीमा कंपनी के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है।
अदालत ने सेवा में कमी और नियमों की अनदेखी के मामले में पीएनबी मैटलाइफ इंडिया इंश्योरेंस कंपनी को आदेश दिया है कि वह वादी को मुकदमा दायर करने की तिथि से 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ 4 लाख 70 हजार रुपये का भुगतान करे।
इसके साथ ही कंपनी पर मानसिक और आर्थिक क्षतिपूर्ति के रूप में जुर्माना भी लगाया गया है।
यह मामला उत्तम नगर, जिला अलीगढ़ के मूल निवासी और वर्तमान में बाग फरहाना, नेहरू एनक्लेव, जिला आगरा के निवासी बोबेंद्र सिंह पुत्र ज्ञानेंद्र सिंह से जुड़ा है।
वादी बोबेंद्र सिंह ने बीमा कंपनी की कार्यप्रणाली से क्षुब्ध होकर स्थाई लोक अदालत की शरण ली थी। शिकायत के अनुसार, उन्होंने पीएनबी मैटलाइफ इंडिया इंश्योरेंस कंपनी से दो जीवन बीमा पॉलिसी ली थीं।
पॉलिसी के नियम और शर्तों के मुताबिक, कंपनी को 15 दिनों के भीतर वेलकम लेटर भेजना था और इसके बाद अधिकतम 30 दिनों में मूल पॉलिसी बॉन्ड वादी को उपलब्ध कराना था।
शिकायतकर्ता का आरोप था कि बीमा कंपनी ने उन्हें वेलकम लेटर तो भेज दिया, लेकिन तय समय सीमा बीतने के बाद भी न तो कोई पॉलिसी बॉन्ड प्रेषित किया और न ही आवश्यक मेडिकल किट उपलब्ध कराई।
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पॉलिसी बॉन्ड न मिलने के कारण वादी अपने निवेश और बीमा सुरक्षा को लेकर असमंजस में रहे और कंपनी की ओर से बार-बार निराशा हाथ लगने पर उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया।
स्थाई लोक अदालत की अध्यक्ष माननीय शोभा पोरवाल, सदस्य हेमलता गौतम और सदस्य पद्मजा शर्मा की पीठ ने मामले की विस्तृत सुनवाई की।
सुनवाई के दौरान वादी के अधिवक्ता विनोद कुमार कमल ने अदालत के समक्ष पुरजोर पैरवी की।
उन्होंने दलील दी कि पॉलिसी बॉन्ड और मेडिकल किट न देना सीधे तौर पर सेवा में कमी और उपभोक्ता के अधिकारों का उल्लंघन है, जिससे उनके मुवक्किल को मानसिक और वित्तीय परेशानी का सामना करना पड़ा।
अदालत ने वादी के अधिवक्ता के तर्कों और साक्ष्यों को सही पाते हुए बीमा कंपनी की लापरवाही पर नाराजगी जताई।
पीठ ने विपक्षी बीमा कंपनी को आदेश दिया कि वह मुकदमा दायर करने की तारीख से लेकर भुगतान के दिन तक 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर के साथ कुल 4 लाख 70 हजार रुपये वादी को वापस करे।
इसके अलावा, अदालत ने उपभोक्ता को हुई मानसिक प्रताड़ना के एवज में कंपनी को 10 हजार रुपये बतौर क्षतिपूर्ति (मुआवजा) भी अदा करने के सख्त निर्देश दिए हैं।
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