कंगना रनौत को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में तलब कर उनके बयान करे दर्ज
आगरा ।
अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत से जुड़े एक मामले में आगरा की अदालत में कानूनी सरगर्मियां तेज हो गई हैं।
मामले के वादी और वरिष्ठ अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा ने पुलिस द्वारा कोर्ट में दाखिल की गई आख्या (रिपोर्ट) को पूरी तरह अधूरा और दोषपूर्ण बताते हुए न्यायालय के समक्ष एक नया प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया है।
वादी पक्ष ने मांग की है कि न्याय की पारदर्शिता और सत्यता को सामने लाने के लिए अदालत स्वयं इस मामले की जांच करे और कंगना रनौत को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में तलब कर उनके बयान दर्ज करे।
प्रार्थना पत्र में वादी पक्ष के वकीलों ने दलील दी है कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएस) की धारा 225 के तहत विस्तृत आख्या प्रस्तुत करने के लिए न्यायालय ने पूर्व में न्यू आगरा पुलिस को निर्देशित किया था।
इसके बावजूद, न्यू आगरा पुलिस ने विपक्ष्या (कंगना रनौत) का सामना किए बिना और उनका बयान लिए बिना ही, महज उनके अधिवक्ता के कथनों के आधार पर एक अधूरी और खानापूर्ति वाली रिपोर्ट अदालत में पेश कर दी।
वादी का आरोप है कि पुलिस ने अब तक की जांच में कंगना रनौत से न तो कोई पूछताछ की है, न ही उनके बयान अंकित किए हैं और न ही मामले से जुड़े साक्ष्यों को जुटाने का कोई गंभीर प्रयास किया है।
ऐसे में पुलिस की इस अधूरी विवेचना के कारण न्यायालय का स्वयं हस्तक्षेप करना आवश्यक हो गया है। न्यायहित में यह बेहद जरूरी है कि अदालत कंगना रनौत को समन जारी कर बुलाए और स्वयं उनसे पूछताछ करे।

न्यायालय ने इस प्रार्थना पत्र की एक प्रति कंगना की जूनियर एडवोकेट सुधा प्रधान को सौंपते हुए इस पर लिखित आपत्ति दर्ज कराने के लिए 8 जुलाई 2026 की तिथि तय की है।
इसी सुनवाई के दौरान कंगना रनौत की मुख्य अधिवक्ता अनुसुइया चौधरी की ओर से उनकी जूनियर सहयोगी सुधा प्रधान के माध्यम से अदालत में एक स्थगन प्रार्थना पत्र दिया गया।
इसमें कहा गया कि मुख्य अधिवक्ता के बीमार होने के कारण वह आज कोर्ट में बहस के लिए उपस्थित होने में असमर्थ हैं, इसलिए उन्हें अगली तारीख दी जाए।
विपक्ष्या की ओर से समय मांगे जाने पर वादी रमाशंकर शर्मा ने अदालत में सख्त लिखित आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी पक्ष जानबूझकर मामले को लंबा खींचने की कोशिश कर रहा है और कानूनी बहस से बचने के लिए बार-बार समय मांग रहा है।
अदालत ने वादी के इस एतराज को रिकॉर्ड पर लेते हुए विपक्षी की अधिवक्ता को अपना अंतिम पक्ष रखने के लिए 8 जुलाई 2026 की अंतिम तिथि नियत कर दी है।
सुनवाई के दौरान वादी रमाशंकर शर्मा एडवोकेट की ओर से पैरवी करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता सुखबीर सिंह चौहान, राजवीर सिंह, राजेंद्र गुप्ता, धीरज, बीएस फौजदार, प्रेम कुमार और आईडी श्रीवास्तव आदि ने अदालत के समक्ष अपने प्रभावी विधिक तर्क प्रस्तुत किए।
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