फ्लैट के नाम पर धोखाधड़ी: उपभोक्ता आयोग ने बिल्डर को 33.50 लाख रुपये मय ब्याज लौटाने का दिया आदेश

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आगरा।

फ्लैट देने का वादा कर रकम हड़पने और समय पर पजेशन न देने के एक मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग द्वितीय ने एक अहम फैसला सुनाया है।

आयोग ने एनआईआईएल (NIIL) इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड के निदेशकों को वादी की जमा राशि 33 लाख 50 हजार रुपये 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ वापस करने का आदेश दिया है।

इसके साथ ही, मानसिक पीड़ा और वाद व्यय के रूप में एक लाख रुपये का अतिरिक्त मुआवजा भी देने का निर्देश दिया गया है।

मामले की पृष्ठभूमि:

इस संबंध में कुंवर कॉलोनी, संतोष हॉस्पिटल खंदारी रोड (आगरा) निवासी डॉ. वाई. पी. सिंह ने अपने अधिवक्ता राम मोहन उपाध्याय के माध्यम से उपभोक्ता आयोग में परिवाद दायर किया था।

वादी का आरोप था कि मार्च 2012 में एनआईआईएल इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड के तत्कालीन कार्यकारी निदेशक प्रभात मिश्रा ने उनसे मुलाकात की थी।

मिश्रा ने उन्हें बताया था कि वे कामायनी हॉस्पिटल के सामने एक बहुमंजिला इमारत का निर्माण कर रहे हैं, जिसमें सभी आधुनिक सुविधाओं से युक्त 3 बीएचके फ्लैट दिए जाएंगे।

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बिल्डर ने वादी को आश्वासन दिया था कि यदि वे इस परियोजना में निवेश करते हैं, तो उन्हें या तो समय पर फ्लैट तैयार करके दिया जाएगा या उनका पैसा वापस कर दिया जाएगा।

इस वादे पर विश्वास करते हुए वादी ने 33 लाख 50 हजार रुपये का भुगतान कर दिया। आरोप है कि पूरी रकम लेने के बावजूद विपक्षी बिल्डर ने न तो वादी को फ्लैट दिया और न ही उनकी धनराशि लौटाई।

आयोग का फैसला:

मामले की सुनवाई करते हुए जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष माननीय आशुतोष एवं सदस्य पारुल कौशिक ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुना।

वादी के अधिवक्ता राम मोहन उपाध्याय द्वारा पेश किए गए साक्ष्यों और दलीलों से सहमत होते हुए आयोग ने इसे बिल्डर की ओर से सेवा में घोर कमी माना।

अपने फैसले में आयोग ने विपक्षी बिल्डर को आदेश दिया कि वह वादी को उनकी मूल धनराशि 33 लाख 50 हजार रुपये 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित वापस करे।

इसके अलावा, वादी को हुई मानसिक परेशानी और कानूनी खर्च (वाद व्यय) के एवज में बिल्डर को एक लाख रुपये की अतिरिक्त राशि भी चुकानी होगी।

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विवेक कुमार जैन
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