आगरा ।
आगरा के थाना जगदीशपुरा क्षेत्र में वर्ष 2017 में हुए एक स्कूली छात्रा के अपहरण और पॉक्सो एक्ट के मामले में विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है।
पीड़िता द्वारा आरोपियों के पक्ष में गवाही देने और अभियोजन की कहानी का समर्थन न करने के कारण विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट माननीय दिनेश कुमार चौरसिया ने मामले के तीन आरोपियों को बरी करने के आदेश दिए हैं।
मामले के अनुसार, 28 अगस्त 2017 को 11वीं कक्षा में पढ़ने वाली 16 वर्षीया छात्रा सुबह स्कूल के लिए निकली थी, लेकिन वापस नहीं लौटी। स्कूल में पूछताछ करने पर पता चला कि वह वहाँ पहुँची ही नहीं थी।
उसकी सहेली ने बताया था कि वह पेट दर्द की बात कहकर घर लौटने की बात कह रही थी। माँ (वादिया) ने पुलिस को यह भी बताया था कि उनकी बेटी किसी एक मोबाइल नंबर पर अक्सर बात करती थी और बाद में उस नंबर को डिलीट कर देती थी।
घटना के करीब एक महीने बाद पुलिस ने पीड़िता को बरामद किया था। बरामदगी के बाद जब उसे चिकित्सीय परीक्षण के लिए जिला अस्पताल भेजा गया, तो उसने अपना मेडिकल कराने से साफ इंकार कर दिया था।
इसके बाद मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज बयानों और कोर्ट में हुई गवाही के दौरान पीड़िता अपने दावों से पूरी तरह मुकर गई।

उसने अदालत में कहा कि वह अपने माता-पिता से नाराज होकर खुद अपनी मर्जी से घर से चली गई थी।
इस दौरान वह मुजफ्फरनगर, सहारनपुर और शिमला घूमने गई थी। उसने स्पष्ट किया कि किसी ने भी उसका अपहरण नहीं किया और न ही उसके साथ कोई गलत काम हुआ।
पुलिस ने इस मामले में मुजफ्फरनगर निवासी तालिब, इरशाद, मोहम्मद आबिद और शाहिद के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया था।
इनमें से एक आरोपी शाहिद की मुकदमे के दौरान मृत्यु हो जाने के कारण उसके खिलाफ कार्यवाही पहले ही समाप्त कर दी गई थी।
विचारण के दौरान अदालत में पीड़िता समेत कुल छह गवाह पेश किए गए। मुख्य गवाह यानी पीड़िता द्वारा ही घटना का समर्थन न किए जाने के कारण मामले में कोई पुख्ता सबूत नहीं बचा।
इसके बाद आरोपियों के अधिवक्ता राजीव गोस्वामी के तर्कों को स्वीकार करते हुए विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट माननीय दिनेश कुमार चौरसिया ने साक्ष्य के अभाव में तालिब, इरशाद और मोहम्मद आबिद को बाइज्जत बरी करने का आदेश जारी किया।
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