आगरा/प्रयागराज।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में स्पष्ट किया है कि यदि उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 के तहत निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया पूरी कर ली गई है, तो प्रशासनिक अधिकारी किसी व्यक्ति की धार्मिक पहचान या धर्म परिवर्तन को अनिश्चितकालीन जांच, संदेह अथवा व्यक्तिगत संतुष्टि के आधार पर बाधित नहीं कर सकते।
जस्टिस अजित कुमार और जस्टिस इन्द्रजीत शुक्ल की खंडपीठ ने इस्लाम धर्म छोड़कर सनातन धर्म अपनाने वाले याचिकाकर्ता मोहम्मद अहसान उर्फ अनिल पंडित की याचिका को निस्तारित करते हुए यह टिप्पणी की।
मामले के अनुसार, याचिकाकर्ता डॉ. मोहम्मद अहसान प्रयागराज के सी.एम.पी. डिग्री कॉलेज में अंग्रेजी के असिस्टेंट प्रोफेसर हैं और वर्ष 2022 से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से भी जुड़े हैं।
उनकी पत्नी बलिया के राजकीय इंटर कॉलेज में अंग्रेजी की प्रवक्ता हैं। याचिकाकर्ता ने इस्लाम छोड़कर सनातन धर्म अपनाने की कानूनी प्रक्रिया पूरी कर ली थी और इसके लिए प्रशासन को आवेदन दिया था।
हालांकि, प्रशासनिक स्तर पर इसे स्वीकार नहीं किया जा रहा था, जिससे इस दंपत्ति को विवाह पंजीकरण, पहचान पत्र, शासकीय अभिलेखों और अन्य वैधानिक अधिकारों को लेकर मानसिक पीड़ा और कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था।

इसके बाद याचिकाकर्ता ने वर्ष 2024 में इलाहाबाद हाईकोर्ट की शरण ली। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता आशीष कुमार श्रीवास्तव ने कोर्ट में बहस करते हुए तर्क दिया कि प्रशासनिक अधिकार संविधान द्वारा दी गई व्यक्तिगत स्वतंत्रता से ऊपर नहीं हो सकते और अधिनियम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रशासनिक अड़चनें पैदा करना कानून सम्मत नहीं है।
कोर्ट ने पूर्व में 05 मई 2026 के आदेश में पाया था कि अधिनियम की धारा 8(1) के तहत आवश्यक घोषणा पहले ही प्रस्तुत की जा चुकी थी और विधिक प्रक्रिया का पालन किया गया था।
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न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद अपर जिलाधिकारी (प्रशासन), प्रयागराज द्वारा 14 मई 2026 को अंतिम आदेश पारित कर याचिकाकर्ता के धर्म परिवर्तन आवेदन को स्वीकार कर लिया गया।
अब हाई कोर्ट ने सक्षम प्राधिकारी से अनुमति मिलने के बाद ए डी एम प्रशासन प्रयागराज को चार हफ्ते के भीतर आवश्यक आदेश पारित करने का निर्देश दिया है।
इसके साथ ही अदालत ने याचिकाकर्ता को कोर्ट के समक्ष दिए गए अपने आश्वासन पर अमल करने और सभी आवश्यक दस्तावेजों में अपना नाम परिवर्तित करने की कार्रवाई करने का आदेश भी जारी किया है।
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