बुलडोजर कार्रवाई पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय की खंडपीठ में मतभेद, मामला तीसरे न्यायाधीश को संदर्भित

उच्च न्यायालय मुख्य सुर्खियां

आगरा /प्रयागराज।

उत्तर प्रदेश में बुलडोजर कार्रवाई (ध्वस्तीकरण) की वैधानिकता पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान एक अहम कानूनी स्थिति उत्पन्न हो गई है।

पॉक्सो अधिनियम और संपत्ति हस्तांतरण से जुड़े एक मामले में सुनवाई कर रही दो जजों की खंडपीठ ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया पर एकमत नहीं हो सकी।

इस वैचारिक भिन्नता के चलते अब मामले को अंतिम निर्णय के लिए तीसरे न्यायाधीश के पास भेज दिया गया है।

मामले की पृष्ठभूमि:

* यह प्रकरण मूल रूप से हमीरपुर जिले से संबंधित है।

Also Read – ज्ञानवापी विवाद: सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित होने के कारण इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई स्थगित, अगली तारीख 24 अगस्त

* याचिकाकर्ताओं ने न्यायालय में आरोप लगाया था कि प्रशासन द्वारा उनकी संपत्तियों को सील करने और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई में उनके संवैधानिक और मौलिक अधिकारों का हनन किया गया है।

* इस याचिका की सुनवाई न्यायमूर्ति अतुल श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ कर रही थी।

न्यायमूर्ति अतुल श्रीवास्तव का मत:

* सुनवाई के दौरान उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के बुलडोजर कार्रवाई संबंधी फैसलों और दिशा-निर्देशों का हवाला दिया।

*उनका स्पष्ट मत था कि केवल आपराधिक मुकदमा (एफआईआर) दर्ज होने मात्र के आधार पर किसी भी आरोपी का मकान ध्वस्त नहीं किया जा सकता।

* उन्होंने यह महत्वपूर्ण सुझाव दिया कि एफआईआर दर्ज होने के बाद कम से कम दो वर्ष तक आरोपी का घर न गिराया जाए, बशर्ते कि सार्वजनिक भूमि को तत्काल अतिक्रमण मुक्त कराना अत्यंत आवश्यक न हो।

Also Read – 6.33 करोड़ की धोखाधड़ी मामले में पूर्व बसपा एमएलसी हाजी इकबाल को हाईकोर्ट से झटका, एफआईआर रद्द करने से इंकार

* इसके अलावा, तीन वर्ष या उससे अधिक पुराने कथित अवैध निर्माणों पर दंडात्मक कार्रवाई से पूर्व एक वर्ष का नोटिस दिए जाने की बात भी उनके द्वारा कही गई।

न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की असहमति:

* पीठ के दूसरे न्यायाधीश, न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन ने न्यायमूर्ति अतुल श्रीवास्तव द्वारा दिए गए उपरोक्त सुझावों और कानूनी तर्कों से स्पष्ट असहमति व्यक्त की।

आगे की न्यायिक प्रक्रिया:

दोनों न्यायाधीशों के बीच कानूनी बिंदुओं पर एक राय न बन पाने के कारण न्यायिक प्रक्रिया के तहत अब इस मामले को तीसरे जज को सौंप दिया गया है।

उत्तर प्रदेश में बुलडोजर कार्रवाई और संपत्तियों के ध्वस्तीकरण से जुड़े भविष्य के मामलों की वैधानिक रूपरेखा तय करने के लिहाज से तीसरे न्यायाधीश का आगामी फैसला अत्यंत निर्णायक माना जा रहा है।

Stay Updated With Latest News Join Our WhatsApp  – Group BulletinChannel Bulletin

मनीष वर्मा
Follow Me

1 thought on “बुलडोजर कार्रवाई पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय की खंडपीठ में मतभेद, मामला तीसरे न्यायाधीश को संदर्भित

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *