आगरा उपभोक्ता फोरम प्रथम का बड़ा फैसला, कार डीलर अशोक ऑटो सेल्स पर लगा जुर्माना, ग्राहक को मिलेंगे 1.15 लाख रुपये मय ब्याज

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आगरा।

जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग-प्रथम, आगरा ने कार डीलर अशोक ऑटो सेल्स लिमिटेड के खिलाफ एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।

आयोग ने नई कार की डिलीवरी न देने और एक्सचेंज में ली गई पुरानी कार के पैसे वापस न करने के मामले में डीलर को सेवा में कमी का दोषी माना है।

आयोग के अध्यक्ष माननीय सर्वेश कुमार और सदस्य राजीव सिंह की पीठ ने 20 जुलाई 2026 को दिए अपने निर्णय में कार डीलर को परिवादी लायक सिंह वर्मा को कुल 1,15,000/- रुपये ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया है।

इसके अतिरिक्त, मानसिक पीड़ा के लिए 10,000/- रुपये और वाद व्यय के लिए 5,000/- रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।

क्या था पूरा मामला ?

कालिंदी विहार, रामबाग, आगरा के रहने वाले लायक सिंह वर्मा ने 16 फरवरी 2023 को अशोक ऑटो सेल्स के सेल्स मैनेजर विशाल सडाना से नई टाटा टिगोर एक्स जेड सीएनजी (ब्लू कलर) गाड़ी खरीदने के लिए संपर्क किया था। एक्सचेंज ऑफर के तहत उन्होंने अपनी पुरानी टाटा सफारी गाड़ी (यूपी 85 ए एफ 5067) डीलर को दी थी।

प्रतिपक्षीगण द्वारा पुरानी टाटा सफारी गाड़ी का अनुमानित मूल्य 90,000/- रुपये और एक्सचेंज बोनस 15,000/- रुपये मिलाकर कुल 1,05,000/- रुपये तय किया गया था।

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इसके साथ ही परिवादी ने नई कार की बुकिंग के लिए 10,000/- रुपये की धनराशि भी जमा की थी।

डीलर ने की सेवा में कमी :

दोनों पक्षों के बीच तय हुआ था कि दो महीने के अंदर पुरानी गाड़ी का ट्रांसफर कराकर नई टाटा टिगोर की डिलीवरी दी जाएगी। लेकिन डीलर ने न तो पुरानी गाड़ी का ट्रांसफर कराया, न ही नई गाड़ी की डिलीवरी दी और न ही बुकिंग के पैसे वापस किए।

परिवादी का आरोप था कि बीमा समाप्त होने के बावजूद डीलर पुरानी गाड़ी का अवैध रूप से प्रयोग कर रहे थे। परेशान होकर ग्राहक ने 30 जून 2023 को विधिक नोटिस भेजा और फिर उपभोक्ता फोरम में परिवाद दाखिल किया।

प्रतिपक्षियों ने अपने बचाव में कहा कि पुरानी गाड़ी को बेचने की कोई समय सीमा तय नहीं थी और उन्होंने सेवा में कोई कमी नहीं की है।

आयोग का सख्त आदेश :

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और रसीदों का अवलोकन करने के बाद, आयोग ने डीलर की दलीलों को खारिज कर दिया और इसे स्पष्ट रूप से सेवा में कमी माना।

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फोरम ने अशोक ऑटो सेल्स की डिस्ट्रीब्यूटर/ओनर डॉ. रंजना बंसल, जीएम शालिनी, सेल्स मैनेजर विशाल सडाना और डी.एस.ई. शिवम को संयुक्त और पृथक रूप से आदेशित किया है कि वे फैसले की तारीख से 45 दिन के भीतर परिवादी को कुल 1,15,000/- रुपये वापस करें।

आदेश के अनुसार, इस पूरी धनराशि पर 28 फरवरी 2023 से लेकर भुगतान की वास्तविक तिथि तक 6 प्रतिशत साधारण वार्षिक ब्याज भी देना होगा।

मानसिक पीड़ा के लिए 10,000/- रुपये और कानूनी खर्च के रूप में 5,000/- रुपये भी आयोग के खाते में डी.डी. के माध्यम से जमा करने होंगे। यदि डीलर 45 दिन के भीतर यह राशि जमा करने में चूक करते हैं, तो परिवादी सम्पूर्ण धनराशि पर 6 प्रतिशत की जगह 9 प्रतिशत वार्षिक दर से साधारण ब्याज प्राप्त करने का अधिकारी होगा।

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विवेक कुमार जैन
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