आगरा जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग प्रथम ने एक महत्वपूर्ण फैसले में डब्ल्यूटीसी नोएडा डेवलपमेंट कंपनी प्राइवेट लिमिटेड नई दिल्ली को आदेश दिया है कि वह उपभोक्ता को नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ बारह लाख चालीस हजार रुपये वापस करे।
इसके साथ ही आयोग ने पीड़ित उपभोक्ता को मानसिक उत्पीड़न और कानूनी खर्च के मुआवजे के रूप में चालीस हजार रुपये अतिरिक्त भुगतान करने का भी निर्देश दिया है।
क्या है पूरा मामला ?
यह मामला आगरा के लॉयर्स कॉलोनी, बाईपास रोड स्थित गणेश नगर निवासी दिलीप कुमार दुबे (पुत्र राम भरोसे दुबे) से जुड़ा है। दिलीप कुमार ने डब्ल्यूटीसी नोएडा डेवलपमेंट कंपनी प्राइवेट लिमिटेड के एक प्रोजेक्ट में दुकान बुक की थी। उन्होंने कंपनी के एजेंट ललित कुमार गुप्ता (राम रघु प्लाजा) के माध्यम से सौदा तय किया था।
इसके तहत उन्होंने 7 अप्रैल 2018 को दुकान की पूरी कीमत यानी बारह लाख चालीस हजार रुपये का एकमुश्त भुगतान कंपनी को कर दिया था।
समझौते के मुताबिक बिल्डर को इस दुकान का कब्जा वर्ष 2021 तक हर हाल में उपभोक्ता को सौंपना था। हालांकि, निर्धारित समय बीत जाने के बाद भी बिल्डर ने न तो दिलीप कुमार को दुकान का कब्जा दिया और न ही उनकी जमा राशि वापस की।

आयोग का रुख और अंतिम आदेश:
बिल्डर के इस रवैये से परेशान होकर दिलीप कुमार ने 1 नवंबर 2021 को जिला उपभोक्ता आयोग की शरण ली।
मामले की सुनवाई के दौरान उपभोक्ता के अधिवक्ता राजेश कुमार ने फोरम के समक्ष मजबूत कानूनी तर्क पेश किए और बिल्डर की सेवा में कमी को रेखांकित किया।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग प्रथम के अध्यक्ष माननीय सर्वेश कुमार और सदस्य राजीव सिंह ने उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाया।
आयोग ने बिल्डर कंपनी को कड़ी फटकार लगाते हुए आदेशित किया कि वह आदेश पारित होने के 45 दिनों के भीतर पीड़ित को शिकायत दर्ज कराने की तिथि (1 नवंबर 2021) से नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर के साथ बारह लाख चालीस हजार रुपये का भुगतान करे।
इसके साथ ही पीड़ित को हुए मानसिक कष्ट और वाद व्यय की क्षतिपूर्ति के लिए चालीस हजार रुपये अलग से देने का आदेश दिया गया है।
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