आगरा/प्रयागराज ।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार और पुलिसकर्मियों की व्यावसायिक गतिविधियों में संलिप्तता पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए सख्त रुख अपनाया है।
कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए यह तल्ख टिप्पणी की है कि राज्य में पुलिस थाने अब कानून-व्यवस्था बनाए रखने के केंद्र न रहकर व्यावसायिक गतिविधियों का स्थान बनते जा रहे हैं।
यह महत्वपूर्ण आदेश जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की एकल पीठ ने हरेन्द्र यादव की याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया है।
पूरा मामला बलिया जिले के रसड़ा थाने से जुड़ा है। याचिकाकर्ता का आरोप था कि सहायक क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (एआरटीओ), बलिया ने उसके ट्रक को मनमाने तरीके से ब्लैकलिस्ट कर दिया था।
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सुनवाई के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि रसड़ा थाने में तैनात कांस्टेबल संतोष कुमार (प्रतिवादी संख्या चार) ने अपने जनरल प्रोविडेंट फंड (जीपीएफ) खाते से पैसे निकालकर याचिकाकर्ता हरेन्द्र यादव के नाम पर वह ट्रक खरीदा था और वह खुद अवैध रूप से ट्रांसपोर्ट का व्यवसाय चला रहा था।
कोर्ट ने इस बात पर कड़ा संज्ञान लिया कि एक पुलिसकर्मी व्यावसायिक गतिविधियों में लिप्त है और अन्य अधिकारियों द्वारा उसे संरक्षण दिया जा रहा है। न्यायालय ने इसे पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार का स्पष्ट मामला माना है।
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए हाईकोर्ट ने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और अपर मुख्य सचिव (गृह) को इस पूरे प्रकरण की गहन जांच करने के आदेश दिए हैं।
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इसके साथ ही, कोर्ट ने रसड़ा थाने में तैनात सभी संलिप्त पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का भी निर्देश दिया है।
हाईकोर्ट ने डीजीपी को निर्देश दिया है कि वह अगले दस दिनों के भीतर की गई कार्रवाई का पूरा ब्यौरा देते हुए न्यायालय में एक हलफनामा दाखिल करें।
न्यायालय अब इस मामले की अगली सुनवाई 11 अगस्त को करेगा।
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