5 साल 4 महीने की लंबी कैद और साक्ष्य के अभाव को देखते हुए न्यायालय ने दिया फैसला
आगरा/नई दिल्ली:
दिल्ली हाई कोर्ट ने टैक्सी ड्राइवर की कथित हत्या के एक मामले में पाँच साल से अधिक समय से जेल में बंद आरोपी सुनील कुमार यादव को नियमित जमानत दे दी है। न्यायमूर्ति अरुण मोंगा की एकल पीठ ने 13 अक्टूबर 2025 को यह आदेश पारित किया।
कोर्ट ने लंबी अवधि की हिरासत (5 साल और 4 महीने) और मुकदमे की धीमी प्रगति को जमानत देने का एक प्रमुख कारण माना।
मामला और आरोप
* FIR संख्या: 167/2020, दिनांक 21.05.2020, पुलिस स्टेशन गोविंद पुरी में दर्ज।
* आरोपी: सुनील कुमार यादव।

* आरोप: भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 365 (अपहरण), 392 (लूट), 302 (हत्या), 411 (बेईमानी से चोरी की संपत्ति प्राप्त करना) और 201 (सबूत मिटाना) के तहत अपराध।
* घटना: शिकायतकर्ता के छोटे भाई, जो ओला टैक्सी ड्राइवर था, के 19 मार्च 2020 को काम से न लौटने पर यह मामला दर्ज किया गया था।
* गिरफ्तारी: आरोपी 30 मई 2020 से हिरासत में था।
कोर्ट के प्रमुख अवलोकन और आरोपी के तर्क
कोर्ट ने प्रथम दृष्टया (Prima Facie) पाया कि जमानत के लिए मामला बनता है, जिसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
* स्वतंत्र साक्ष्य का अभाव: कोर्ट ने पाया कि मामले के सभी गवाह पुलिस अधिकारी हैं और आरोपी को कथित अपराध से जोड़ने वाला कोई स्वतंत्र या प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं है।
* मृत शरीर की बरामदगी नहीं: मृतक का शरीर अभी तक बरामद नहीं किया गया है।
* बरामदगी पर संदेह: हालांकि, मृतक की कार और मोबाइल फोन झारखंड से आरोपी की निशानदेही पर बरामद किए गए थे। आरोपी पक्ष ने तर्क दिया कि ये बरामदगी हत्या नहीं, बल्कि केवल चोरी का मामला बनाती हैं। बचाव पक्ष के अनुसार, आरोपी को कार लावारिस मिली थी और COVID अवधि के कारण वह पुलिस को सूचित नहीं कर पाया, जिसके चलते उसे झूठा फंसाया गया।
* हिरासत की अवधि: आरोपी 5 साल और 4 महीने से न्यायिक हिरासत में था और ट्रायल निकट भविष्य में समाप्त होने की संभावना नहीं है। कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि “जमानत एक नियम है और जेल एक अपवाद।”
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* फरार होने का जोखिम नहीं: कोर्ट ने पाया कि आरोपी के भागने की कोई आशंका नहीं है, क्योंकि वह शादीशुदा है, उसके दो बच्चे स्कूल में पढ़ते हैं, और वह अपने परिवार, जिसमें उसके माता-पिता, दो भाई और छह बहनें शामिल हैं, का प्राथमिक देखभालकर्ता है, जो उस पर निर्भर हैं।
कोर्ट ने साफ किया कि यह आदेश केवल जमानत याचिका के निपटान के उद्देश्य से है और ट्रायल की मेरिट पर कोई राय नहीं मानी जाएगी।
आदेश के तहत, सुनील कुमार यादव को ट्रायल कोर्ट/ड्यूटी जज की संतुष्टि के अनुसार व्यक्तिगत मुचलका और समान राशि का सॉल्वेंट जमानती प्रस्तुत करने पर जमानत पर रिहा किया जाएगा।
अपील कर्ता की तरफ़ से प्रभावी पैरवी अधिवक्ता घनश्याम शर्मा विकास शर्मा, लक्ष्य महाजन व शिवांगी चंद द्वारा की गई
Attachment/Order/Judgement – high_court_order
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