आगरा के जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, प्रथम ने इंडियन बैंक द्वारा पीपीएफ (एचयूएफ) खातों की परिपक्वता राशि से अवैध रूप से लाखों रुपये की कटौती करने के तीन अलग-अलग मामलों में ग्राहकों के पक्ष में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।
आयोग ने बैंक की इस कार्यवाही को सेवा में कमी और अनुचित व्यापारिक व्यवहार मानते हुए, बैंक को रोकी गई पूरी धनराशि मय ब्याज और जुर्माने के साथ लौटाने का आदेश दिया है।
यह मामले संजीव सुराना संस (एचयूएफ), अनूप सुराना (एचयूएफ), और रंजीत सिंह जैन (एचयूएफ) द्वारा इंडियन बैंक की आगरा स्थित शाखाओं (छीलीईट और देहलीगेट) के खिलाफ दायर किए गए थे।
तीनों मामलों में परिवादियों ने वर्ष 2000 में पीपीएफ खाते खोले थे। परिवादियों का आरोप था कि बैंक ने उनके पीपीएफ खाते बंद कर नई बचत खातों में धनराशि स्थानांतरित करते समय उनकी पूरी जमा राशि नहीं लौटाई।
बैंक ने अवैध तरीके से संजीव सुराना के 4,79,903.92/- रुपये, अनूप सुराना के 4,83,532.06/- रुपये, और रंजीत सिंह जैन के 4,57,494.90/- रुपये रोक लिए थे।
इस मामले में बैंक का तर्क था कि आरबीआई के दिशा-निर्देशों के अनुसार पीपीएफ खाते का संचालन केवल 15 वर्ष के लिए होता है, इसलिए 15 वर्ष के बाद का ब्याज देय नहीं है।

आयोग के अध्यक्ष माननीय सर्वेश कुमार और सदस्य श्री राजीव सिंह की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए पाया कि बैंक ने 15 वर्ष की अवधि पूरी होने से पहले ग्राहकों को कभी कोई सूचना नहीं दी।
इसके विपरीत, बैंक नियमित रूप से परिवादियों से धनराशि स्वीकार करता रहा और उस पर अर्जित ब्याज भी उनके खातों में जमा करता रहा।
बैंक ने खाते की अवधि बढ़ाने के लिए ग्राहकों से कोई फॉर्म भी नहीं भरवाया और स्वयं आरबीआई के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करते हुए खातों की अवधि का विस्तार किया।
आयोग ने स्पष्ट किया कि बैंक अपनी गलती के लिए ग्राहकों को आर्थिक नुकसान नहीं पहुंचा सकता है।
अपने अंतिम फैसले में आयोग ने इंडियन बैंक को आदेश दिया है कि वह संजीव सुराना को 4,79,903.92/- रुपये (11 मई 2022 से), अनूप सुराना को 4,83,532.06/- रुपये (9 मई 2022 से), और रंजीत सिंह जैन को 4,57,494.90/- रुपये (11 मई 2022 से) की कटौती की गई राशि 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज के साथ 45 दिन के भीतर लौटाए।
इसके अतिरिक्त, तीनों परिवादियों को मानसिक पीड़ा के लिए 20,000/- -20,000/- रुपये और वाद व्यय के लिए 10,000/- -10,000/- रुपये का भुगतान करने का भी निर्देश दिया गया है।
यदि बैंक 45 दिन के भीतर यह भुगतान करने में विफल रहता है, तो उसे 6 प्रतिशत के स्थान पर 9 प्रतिशत की दर से ब्याज देना होगा।
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