अदालत ने विभिन्न धाराओं में चार बार दिया ‘मृत्यु दण्ड” और ₹4,50,000/- का जुर्माना
आगरा।
आगरा की विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट)/अपर सत्र न्यायाधीश, न्यायालय सं० 27, माननीय सोनिका चौधरी की अदालत ने 16 अक्टूबर 2025 एक ऐतिहासिक और कठोर फैसला सुनाया है।
अदालत ने 5 वर्षीय बच्ची के अपहरण, सामूहिक दुष्कर्म (गैंगरेप), फिरौती की मांग और निर्मम हत्या के जघन्य मामले में दो दोषियों, अमित और निखिल को मृत्यु दण्ड(फांसी) की सज़ा सुनाई है।
न्यायालय ने इस अपराध को ‘दुर्लभ में दुर्लभतम’ (Rarest of Rare) मानते हुए अलग-अलग धाराओं में एक-एक लाख रुपये के अर्थदण्ड के साथ, चार बार मृत्यु दण्ड का आदेश दिया है।
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न्यायालय का दण्डादेश (सज़ा का विवरण) – 16 अक्टूबर 2025:
विशेष न्यायाधीश माननीय सोनिका चौधरी ने दोनों अभियुक्तों को फांसी की सज़ा सुनाते हुए निर्देश दिया कि
“दोषसिद्ध अभियुक्तगण अमित व निखिल प्रत्येक को गर्दन में फांसी लगाकर तब तक लटकाया जाये, जब तक कि उनकी मृत्यु न हो जाये।” (Both Accused Amit and Nikhil to be hanged by the neck until they are dead.)
दोनों दोषियों को निम्नलिखित धाराओं में मृत्यु दण्ड दिया गया है:
| 1. | धारा 302/34 (आईपीसी) | हत्या | मृत्यु दण्ड (फांसी) | ₹1,00,000/-
| 2. | धारा 376 डीबी/34 (आईपीसी) | सामूहिक दुष्कर्म (Aggravated Gangrape) | मृत्यु दण्ड (फांसी)
| 3. | धारा 5एम/6 व 5जी/6 (पॉक्सो एक्ट) | लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम | मृत्यु दण्ड (फांसी)
| 4. | धारा 364ए/34 (आईपीसी) | फिरौती के लिए अपहरण | मृत्यु दण्ड (फांसी) ₹50,000/-
इसके अतिरिक्त, अभियुक्तों को अन्य गंभीर अपराधों में भी सज़ा सुनाई गई है, जो सभी सज़ाओं के साथ-साथ चलेंगी (Concurrently):
* धारा 377/34 (आईपीसी): अप्राकृतिक अपराध के लिए आजीवन कारावास और ₹50,000/- का अर्थदण्ड।
* धारा 201/34 (आईपीसी): साक्ष्य मिटाने के लिए 7 वर्ष का सश्रम कारावास और ₹25,000/- का अर्थदण्ड।
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पीड़िता के माता-पिता को मिलेगा मुआवज़ा:
न्यायालय ने निर्देश दिया है कि अर्थदण्ड के रूप में जमा की गई समस्त धनराशि (₹2,25,000 x 2 = ₹4,50,000/-) पीड़िता के माता-पिता को प्रदान की जाएगी।
मृत्यु दण्ड का निष्पादन माननीय उच्च न्यायालय, इलाहाबाद से दण्डादेश की पुष्टि होने तक स्थगित रहेगा।
जघन्य अपराध का विवरण:
मामला थाना बाह, जिला आगरा का है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, घटना का विवरण इस प्रकार है:
* अपराध की तिथि: 18 मार्च 2024 को, लगभग 5 वर्ष 6 माह की पीड़िता लापता हो गई थी।
* फिरौती की मांग: लापता होने के अगले ही दिन, 19 मार्च 2024 को, दोषी अमित ने पीड़िता के पिता को फोन कर ₹6 लाख की फिरौती मांगी और पुलिस को सूचना देने पर हत्या की धमकी दी।
* हत्या और शव बरामदगी: फिरौती न मिलने पर, अभियुक्तों अमित और निखिल ने बच्ची के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया और फिर उसकी निर्मम हत्या कर दी।
* पोस्टमार्टम रिपोर्ट: पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला घोंटने (दबाव के निशान) और बलात्कार के स्पष्ट संकेत मिले थे। 20 मार्च 2024 को रेलवे लाइन के किनारे सरसों के एक खेत से बच्ची का शव बरामद हुआ था।
न्यायालय ने सभी साक्ष्यों के आधार पर 08 अक्टूबर 2025 को दोनों अभियुक्तों अमित (पुत्र रामसरन) और निखिल (पुत्र रामबिहारी) को दोषी करार दिया था, जिसके बाद उन्हें उनके जघन्य अपराधों के लिए मौत की सज़ा सुनाई गई है।
अभियोजन पक्ष के तरफ़ से प्रभावी पैरवी एडीजीसी सुभाष गिरी और विशेष लोक अभियोजक पॉक्सो आगरा विजय किशन लवानिया द्वारा की गई ।
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