आगरा ।
आगरा की एक विशेष अदालत ने पुलिस कस्टडी में महिला आरोपी के साथ बर्बरता और मारपीट के मामले को गंभीरता से लेते हुए दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करने और विभागीय जांच शुरू करने का आदेश दिया है।
अदालत ने पुलिस के इस कृत्य को माननीय सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों का घोर उल्लंघन और मानवाधिकारों का हनन माना है।
यह मामला सिकंदरा थाना क्षेत्र से जुड़ा है, जहां अभियुक्त सीमा सिकरवार को पुलिस ने गिरफ्तार किया था।
आरोपी महिला ने अदालत के समक्ष बयान दिया कि उपनिरीक्षक सुरजीत सिंह, उपनिरीक्षक नीलेश शर्मा और दो महिला दरोगाओं ने उसके घर में तोड़फोड़ की और थाने लाकर उसके साथ लात-घूंसों व बेल्ट से बुरी तरह मारपीट की।
महिला ने आरोप लगाया कि उसके निजी अंगों पर भी चोटें पहुंचाई गईं, जिससे वह चलने-फिरने में असमर्थ हो गई।
अदालत के आदेश पर कराए गए नए मेडिकल परीक्षण में महिला के शरीर पर तीन चोटें पाई गईं, जो साधारण प्रकृति की थीं और किसी कठोर व कुंद वस्तु से पहुंचाई गई थीं।

मेडिकल रिपोर्ट और पुलिस की जनरल डायरी के मिलान से यह स्पष्ट हुआ कि महिला को 4 जून 2026 को गिरफ्तार किया गया था और ये चोटें पुलिस कस्टडी के दौरान ही पहुंचाई गईं।
प्रभारी विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट माननीय बटेश्वर कुमार ने अपने आदेश में कहा कि पुलिस हिरासत में महिला के साथ किया गया यह उत्पीड़न सर्वोच्च न्यायालय द्वारा डीके बसु बनाम पश्चिम बंगाल राज्य और जोगेंद्र सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य के मामलों में दिए गए कानूनी दिशा-निर्देशों का खुला उल्लंघन है।
अदालत ने संबंधित थानाध्यक्ष सिकंदरा को आदेशित किया है कि वे इस मामले में शामिल उपनिरीक्षक सुरजीत सिंह, उपनिरीक्षक नीलेश शर्मा, महिला उपनिरीक्षक नेहा और महिला हेड कांस्टेबल सीमा के खिलाफ सुसंगत धाराओं में तत्काल प्रथम सूचना रिपोर्ट पंजीकृत करें और एक दिन के भीतर उसकी प्रति अदालत के समक्ष प्रस्तुत करें।
इसके साथ ही पुलिस आयुक्त आगरा को पूरे मामले की विभागीय जांच कर एक महीने के भीतर कार्रवाई की रिपोर्ट अदालत में सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
आदेश की प्रतियां त्वरित अनुपालन के लिए पुलिस महानिदेशक लखनऊ और पुलिस कमिश्नरेट आगरा को भी भेज दी गई हैं।
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