आगरा/प्रयागराज ।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाजियाबाद के एक परिवार को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ उत्तर प्रदेश गैंगस्टर एक्ट के तहत दर्ज मुकदमे को पूरी तरह से रद्द कर दिया है।
इसके साथ ही न्यायालय ने इस मामले में गाजियाबाद के तत्कालीन पुलिस कमिश्नर की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए सख्त फटकार लगाई है।
यह आदेश जस्टिस विनोद दिवाकर की एकल पीठ ने मामले की विस्तृत सुनवाई के बाद पारित किया।
यह पूरा मामला गाजियाबाद के राजेंद्र त्यागी और उनके परिवार से जुड़ा हुआ है। 12 फरवरी 2023 को गाजियाबाद के नंदग्राम थाने में राजेंद्र त्यागी, उनके बेटे दीपक त्यागी और बहू लालिता त्यागी के खिलाफ उत्तर प्रदेश गैंगस्टर एक्ट की धारा 2 और 3 के तहत एक प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज की गई थी।
पुलिस का आरोप था कि यह परिवार एक संगठित गिरोह के रूप में काम करता है और लोगों को जमीन व प्लॉट दिलाने के नाम पर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी और ठगी को अंजाम देता है।

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पुलिस की कार्रवाई को पूरी तरह अनुचित पाया। माननीय न्यायालय ने स्पष्ट किया कि जिन दो मूल प्राथमिकियों को आधार बनाकर गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई की गई थी, वे वास्तव में केवल जमीन की खरीद-बिक्री से जुड़े वित्तीय विवाद के मामले हैं।
कोर्ट ने कहा कि चार्जशीट में ऐसा कोई भी ठोस तथ्य या साक्ष्य मौजूद नहीं है जो उत्तर प्रदेश गैंगस्टर एक्ट की धारा 2(बी) के तहत किसी को गैंगस्टर घोषित करने की आवश्यक शर्तों को पूरा करता हो।
अदालत ने इस मामले में गाजियाबाद के तत्कालीन पुलिस कमिश्नर अजय कुमार मिश्र (जो वर्तमान में आईजी पुलिस, प्रयागराज के पद पर कार्यरत हैं) के रवैये के खिलाफ बेहद कड़ी टिप्पणी की।
कोर्ट ने विशेष रूप से परिवार की बहू ललिता त्यागी की गिरफ्तारी को लेकर नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि 35 वर्षीय गृहिणी ललिता त्यागी की गिरफ्तारी पूरी तरह से गैरकानूनी, अनुचित और मनमानी थी।
पुलिस के पास उनके खिलाफ कोई ठोस आधार नहीं था, फिर भी उन्हें लगभग 80 दिनों तक न्यायिक हिरासत में जेल में रहना पड़ा, जो उनके मानवाधिकारों का हनन है।
हाईकोर्ट ने माना कि सिविल प्रकृति के या सामान्य वित्तीय विवादों में बिना किसी ठोस आपराधिक इतिहास या गिरोह के साक्ष्य के गैंगस्टर एक्ट जैसी गंभीर धाराओं का दुरुपयोग नहीं किया जाना चाहिए।
न्यायालय ने परिवार के खिलाफ चल रही गैंगस्टर एक्ट की पूरी कानूनी कार्यवाही को निरस्त करते हुए याचिकाकर्ताओं को राहत प्रदान की है।
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