आगरा ।
आगरा की एक अदालत ने पिता की गैर-इरादतन हत्या के मामले में आरोपी बेटे को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है।
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (कोर्ट संख्या 14) माननीय ज्योत्सना सिंह ने इस मामले की सुनवाई की।
अदालत ने दोषी पुत्र के कैंसर जैसी असाध्य बीमारी से पीड़ित होने के कारण उसके प्रति सहानुभूतिपूर्ण रुख अपनाया और उसे दो वर्ष एक माह के कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही दोषी पर पांच हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।
क्या थी पूरी घटना ?
यह मामला आगरा जिले के थाना खेरा राठौर अंतर्गत ग्राम पुरा गुमान सिंह का है। घटना 20 मई 2024 की शाम करीब 7 बजे की है। पीड़िता श्रीमती श्यामवती का अपने छोटे बेटे अजय से किसी बात पर विवाद हो गया था।
इस दौरान उनके बड़े बेटे हरनरायन और पति रामशंकर ने अजय को समझाने का प्रयास किया। इसी बीच अजय की पत्नी टीना भी वहां आ गई और उसने गाली-गलौज शुरू कर दी।
विवाद बढ़ने पर अजय ने आवेश में आकर अपने पिता रामशंकर के सिर पर कुल्हाड़ी से प्रहार कर दिया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। इलाज के दौरान 22 मई 2024 को रामशंकर की मृत्यु हो गई।
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पुलिस की कार्रवाई और गवाही:
मृतक की पत्नी श्यामवती की तहरीर पर पुलिस ने आरोपी अजय और उसकी पत्नी टीना के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या और गाली-गलौज की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था।
विवेचना के बाद पुलिस ने दोनों के विरुद्ध अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया। विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से शिकायतकर्ता श्यामवती और उनके बड़े बेटे हरनरायन सहित कुल 11 गवाहों को अदालत में पेश किया गया।
अदालत का रुख और फैसला:
सुनवाई के दौरान सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता एस.पी. भारद्वाज ने अपनी दलीलें पेश कीं। वहीं, आरोपी अजय ने अदालत में बयान दिया कि वह घटना से पहले ही कैंसर की बीमारी से जूझ रहा था।
उसका अपनी मां से विवाद इसलिए हुआ था क्योंकि मां उसका इलाज नहीं करवा रही थी। आरोपी का दावा था कि विवाद के दौरान उसकी मां ने उस पर ईंट-पत्थर फेंके थे, जिसमें से एक पत्थर पिता को लग गया और वे घायल हो गए। इसके साथ ही उसने मां द्वारा जमीन का बैनामा बेटियों के नाम करने की बात भी कही।
अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने और पत्रावली का अवलोकन करने के बाद अजय को दोषी माना। हालांकि, उसकी गंभीर शारीरिक स्थिति और कैंसर की बीमारी को देखते हुए न्यायाधीश माननीय ज्योत्सना सिंह ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाया और उसे कम से कम अवधि यानी दो वर्ष एक माह की कैद की सजा से दंडित किया।
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