आगरा।
जिला उपभोक्ता आयोग प्रथम, आगरा ने फ्लैट बुकिंग के मामले में सेवा में कमी पाए जाने पर परिवादी के पक्ष में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
न्यायालय ने आयोग के बैंक खाते में जमा कुल तीन लाख रुपये की धनराशि को एकाउन्टपेई चेक के माध्यम से परिवादी पंकज कुमार गुप्ता को तत्काल भुगतान करने का आदेश दिया है।
इस संदर्भ में पंजाब नेशनल बैंक, सूर्या नगर शाखा का एक चेक भी तैयार किया जा चुका है।जिसे आयोग के अध्यक्ष माननीय सर्वेश कुमार और सदस्य राजीव सिंह ने परिवादी को सौंपा ।
यह मामला वर्ष 2016 से चल रहा है, जब श्रीमती मधु वैश्य (जिनकी बाद में मृत्यु हो गई और उनके स्थान पर पंकज कुमार गुप्ता व पारुल गोयल विधिक प्रतिनिधि बने) ने दयाल बाग स्थित नंदनी एन्क्लेव में एक फ्लैट के लिए बिल्डर फर्म फौजदार एंड सिंह के पास सात लाख रुपये जमा किए थे।
निर्धारित समय सीमा के भीतर फ्लैट का निर्माण पूरा न होने और कब्जा न मिलने पर पीड़ितों ने उपभोक्ता आयोग की शरण ली थी।
बिल्डर पक्ष ने फर्म के विघटन और अपनी सीमित हिस्सेदारी का तर्क देकर जिम्मेदारी से बचने का प्रयास किया था, लेकिन न्यायालय ने इस तर्क को खारिज कर दिया।
जिला उपभोक्ता आयोग ने 9 मई 2024 को अपने मुख्य निर्णय में यह स्पष्ट किया था कि बुकिंग राशि जमा करने के बाद खरीदार उपभोक्ता की श्रेणी में आता है।
आयोग ने पार्टनरशिप एक्ट के तहत सभी भागीदारों को एकल और संयुक्त रूप से उत्तरदायी मानते हुए ब्याज सहित धनराशि लौटाने तथा मानसिक क्षतिपूर्ति व वाद व्यय देने का आदेश दिया था।
इस निर्णय के खिलाफ विपक्षी नरायन सिंह फौजदार ने राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, लखनऊ में अपील दायर की थी।

राज्य आयोग के अध्यक्ष माननीय न्यायमूर्ति श्री अशोक कुमार ने 30 जुलाई 2024 को निचली अदालत के फैसले को पूरी तरह सही ठहराते हुए अपील को निरस्त कर दिया था।
राज्य आयोग के इसी आदेश के अनुपालन में, अपील के समय जमा की गई धनराशि भी जिला आयोग को ट्रांसफर कर दी गई थी, जिसे प्रतिपक्षी नियमानुसार वापस प्राप्त कर सकता है।
लंबे विधिक संघर्ष के बाद अब जिला उपभोक्ता आयोग ने मुख्य वसूली राशि का चेक डिक्रीदार को सौंपने की प्रक्रिया पूरी कर दी है।
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