कार का घोषित बीमा मूल्य (IDV) की धनराशि का ब्याज सहित भुगतान किए जाने का दिया आदेश
आगरा:
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग-प्रथम, आगरा ने एक महत्वपूर्ण फैसले में ‘दि न्यू इण्डिया एश्योरेंस कम्पनी’ को आदेश दिया है कि वह परिवादिनी को कार की घोषित बीमा मूल्य (IDV) की धनराशि ब्याज सहित भुगतान करे।
आयोग ने स्पष्ट किया कि बीमा कंपनियों को क्लेम सेटल करते समय अत्यधिक तकनीकी नहीं होना चाहिए।
मामले की पृष्ठभूमि
परिवादिनी श्रीमती चारू कुशवाहा ने अपनी हुण्डई ग्राण्ड आई-10 कार (पंजीकरण संख्या- UP 80 DC 6041) का बीमा 2,86,562/- रुपये में कराया था।मार्च 2021 में कोसीकलां, मथुरा में कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई।
वर्कशॉप द्वारा कार की मरम्मत का अनुमानित खर्च 4,51,450 रुपये बताया गया, जो कार की IDV से कहीं अधिक था, जिससे मामला ‘टोटल लॉस’ (Total Loss) की श्रेणी में आ गया।
बीमा कंपनी का रुख और आयोग का अवलोकन:
बीमा कंपनी ने सूचना में देरी और अन्य तकनीकी आधारों पर क्लेम को निरस्त कर दिया था।
हालाँकि, आयोग ने पाया कि:
* परिवादिनी ने दुर्घटना के तुरंत बाद ब्रोकर (पॉलिसी बाजार) को सूचित कर दिया था।
* होली के त्यौहार और सार्वजनिक अवकाश के कारण कागजी कार्रवाई में हुई देरी को परिवादिनी की गलती नहीं माना जा सकता।
* बीमा कंपनी यह साबित करने में विफल रही कि परिवादिनी ने कोई महत्वपूर्ण जानकारी छिपाई है।
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आयोग का ऐतिहासिक निर्णय:
आयोग के अध्यक्ष माननीय सर्वेश कुमार एवं सदस्य राजीव सिंह ने सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न दृष्टांतों (जैसे गुरूमेल सिंह बनाम नेशनल इंश्योरेंस कंपनी) का हवाला देते हुए कहा कि बीमा कंपनियां ऐसे दस्तावेजों की मांग नहीं कर सकतीं जो बीमित व्यक्ति के नियंत्रण से बाहर हों।
मुख्य आदेश:
* बीमा राशि: कार की IDV (2,86,562/- रुपये) में से 5% सॉल्वेज काटकर शेष 2,72,234/- रुपये का भुगतान किया जाए।
* ब्याज: परिवाद दायर करने की तिथि (15.07.2022) से भुगतान तक 6% वार्षिक साधारण ब्याज देय होगा।
* क्षतिपूर्ति: मानसिक पीड़ा के लिए 10,000/- रुपये और वाद व्यय के लिए 5,000/- रुपये अतिरिक्त देने होंगे।
* समय सीमा: यदि 45 दिनों के भीतर भुगतान नहीं किया जाता, तो ब्याज दर बढ़ाकर 9% वार्षिक कर दी जाएगी।
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