अदालत ने कहा संज्ञान से पूर्व अभियुक्त को बुलाकर बयान दर्ज कराने का कानूनी प्रावधान नहीं
आगरा।
हिमाचल प्रदेश के मंडी लोकसभा क्षेत्र से भाजपा सांसद एवं अभिनेत्री कंगना रनौत के विरुद्ध चल रहे मानहानि एवं राजद्रोह के मामले में आगरा स्थित अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट एवं विशेष न्यायाधीश (एमपी/एमएलए), न्यायालय संख्या 07 के न्यायाधीश माननीय अनुज कुमार सिंह ने एक महत्वपूर्ण कानूनी आदेश पारित किया है।
अदालत ने वादी एवं वरिष्ठ अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा द्वारा पुलिस की जांच आख्या को अधूरी बताते हुए कंगना रनौत को न्यायालय में तलब कर बयान दर्ज कराने की मांग वाले प्रार्थना पत्र को निरस्त कर दिया है।
इस आदेश के उपरांत वादी ने बताया कि वह एमपी/एमएलए कोर्ट के इस निर्णय के विरुद्ध सेशन कोर्ट में रिवीजन याचिका दाखिल करेंगे।
आख्या अधूरी होने का आरोप और 6 जून को प्रस्तुत प्रार्थना पत्र:
प्रकरण में वादी रमाशंकर शर्मा एडवोकेट द्वारा 6 जून 2026 को न्यायालय के समक्ष एक प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया था।
इसमें उल्लेख किया गया था कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 225(1) के तहत अदालत ने थाना न्यू आगरा पुलिस को दोनों पक्षों के बयानों की जांच कर आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे।
वादी का आरोप था कि न्यू आगरा पुलिस ने वादी और गवाहों के बयान तो दर्ज किए, लेकिन विपक्षी कंगना रनौत का व्यक्तिगत बयान न लेकर उनकी अधिवक्ता अनसूया चौधरी का बयान दर्ज कर जांच रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत कर दी, जो कि विधिक दृष्टि से अधूरी है।
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अधिवक्ता के बयान पर कानूनी आपत्ति और वादी की आशंका:
प्रार्थना पत्र में वादी की ओर से यह याचना की गई थी कि न्यायालय उक्त धारा के तहत कंगना रनौत को व्यक्तिगत रूप से तलब कर स्वयं उनका बयान दर्ज करे।
वादी ने तर्क दिया कि कानूनन किसी भी अधिवक्ता को अपने पक्षकार की ओर से बयान देने का अधिकार नहीं होता।
अधिवक्ता केवल अपने पक्षकार की पैरवी कर सकता है। वादी ने यह आशंका भी जताई कि यदि न्यायालय कंगना रनौत के विरुद्ध कोई आदेश पारित करता है, तो उन्हें भविष्य में यह कहने का अवसर मिल सकता है कि उन्होंने पुलिस को कोई बयान नहीं दिया था और उनकी अधिवक्ता ने क्या बयान दिया, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है।
विशेष न्यायालय का कानूनी निर्णय और अगली सुनवाई की तिथि:
न्यायाधीश माननीय अनुज कुमार सिंह ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने तथा पत्रावली का अवलोकन करने के बाद वादी के प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया।
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि धारा 225 बीएनएसएस के तहत अन्वेषण का उद्देश्य केवल न्यायालय को यह विनिश्चित करने में सहयोग देना है कि विपक्षी के खिलाफ कार्यवाही करने के लिए पर्याप्त आधार हैं या नहीं।
न्यायालय ने रेखांकित किया कि कानून में अपराध का संज्ञान लेने से पूर्व अभियुक्त को तलब कर व्यक्तिगत रूप से बयान दर्ज कराने का कोई प्रावधान नहीं है। इसके साथ ही अदालत ने मामले को संज्ञान पर अंतिम बहस के लिए 5 सितंबर 2026 की तिथि पर नियत कर दिया है।
पूर्व में सेशन कोर्ट से मिली राहत और अनदेखी का आरोप:
वादी के अनुसार, इस वाद को अवर न्यायालय द्वारा पूर्व में 6 मई 2025 को निरस्त किया गया था। इस आदेश के विरुद्ध वादी ने सेशन कोर्ट में रिवीजन दाखिल की थी।
सेशन कोर्ट ने 12 नवंबर 2025 को रिवीजन स्वीकार करते हुए अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि पुलिस की जांच आख्या अधूरी है और बिना जांच पूरी किए सुनवाई नहीं की जा सकती।
सेशन कोर्ट ने अवर न्यायालय को पुनः प्रक्रिया पूरी करते हुए विधि सम्मत आदेश पारित करने के निर्देश दिए थे। वादी का कहना है कि अवर न्यायालय ने सेशन कोर्ट के उक्त आदेश की अनदेखी करते हुए अधूरी आख्या पर ही प्रार्थना पत्र को निरस्त किया है, जिसके विरुद्ध अब पुनः सेशन कोर्ट की शरण ली जाएगी।
सुनवाई के दौरान अदालत में वादी रमाशंकर शर्मा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुखबीर सिंह चौहान, राजवीर सिंह, प्रीति गुप्ता तथा बी.एस. फौजदार उपस्थित रहे।
वहीं, विपक्षी कंगना रनौत की ओर से उच्चतम न्यायालय की अधिवक्ता सुधा प्रधान न्यायालय में मौजूद रहीं।
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