दहेज उत्पीड़न मामले में 22 साल बाद पति समेत तीन आरोपी बरी, गवाहों के बयानों में मिला विरोधाभास

न्यायालय मुख्य सुर्खियां

आगरा।

दहेज उत्पीड़न और मारपीट के एक मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) माननीय शारिब अली की अदालत ने घटना के 22 वर्ष बाद फैसला सुनाते हुए पति, देवर और देवरानी को दोषमुक्त (बरी) करने के आदेश दिए हैं।

अदालत ने अभियोजन पक्ष के गवाहों के बयानों में गंभीर विरोधाभास पाए जाने और बचाव पक्ष के अधिवक्ता के तर्कों से सहमत होते हुए यह निर्णय सुनाया।

मामले का संक्षिप्त विवरण:

थाना ताजगंज में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, तुलसी चबूतरा (थाना ताजगंज, आगरा) के निवासी वादी राम प्रकाश बघेल ने अपनी पुत्री प्रतिभा का विवाह 9 फरवरी 1999 को राजेश कुमार पाल के साथ किया था।

वादी का आरोप था कि विवाह में दिए गए दहेज से ससुराल पक्ष संतुष्ट नहीं था।

आरोपी पति राजेश कुमार पाल, देवर अनिल कुमार पाल और देवरानी उषा (सभी निवासी आवास विकास कॉलोनी, राजेंद्र नगर, बरेली) वादी की पुत्री को अतिरिक्त दहेज के रूप में 50 हजार रुपये नकद, एक रंगीन टीवी और वॉशिंग मशीन की मांग को लेकर मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताड़ित करते थे।

वादी के अनुसार, मांग पूरी न कर पाने की स्थिति में आरोपियों ने 3 मई 2002 को पीड़िता के साथ मारपीट कर उसे घर से निकाल दिया था।

अदालती कार्यवाही और निर्णय:

इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत में वादी और उसकी पुत्री (पीड़िता) सहित कुल 5 गवाह पेश किए गए।

सुनवाई के दौरान आरोपियों के अधिवक्ता देवेंद्र सिंह ने अदालत के समक्ष तर्क प्रस्तुत किए कि गवाहों के बयानों में आपस में भारी विरोधाभास है और अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा है।

सीजेएम माननीय शारिब अली ने पत्रावली का अवलोकन करने और गवाहों के बयानों में गंभीर विरोधाभास को देखते हुए बचाव पक्ष के तर्कों को सही माना।

अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में पति राजेश कुमार पाल, देवर अनिल कुमार पाल और देवरानी उषा को सभी आरोपों से बरी कर दिया।

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विवेक कुमार जैन
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