आगरा।
विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) माननीय सोनिका चौधरी की अदालत ने एक किशोरी के अपहरण और पॉक्सो एक्ट के मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है।
अदालत में सुनवाई के दौरान पीड़िता ने आरोपी को पहचानने से ही इनकार कर दिया, जिसके बाद न्यायालय ने झूठा मुकदमा दर्ज कराने वाली पीड़िता की मां (वादिया) के खिलाफ ही विधिक कार्यवाही करने के आदेश दिए हैं।
मुकदमे की पृष्ठभूमि:
थाना जगदीशपुरा में दर्ज मामले के अनुसार, वादिया ने 20 जुलाई 2025 को अपनी नाबालिग पुत्री को बहला-फुसलाकर अगवा करने का आरोप लगाते हुए एक मुकदमा दर्ज कराया था।
यह मुकदमा प्रमोद कुमार (पुत्र विशंभर सिंह, निवासी टेड़ी बगिया, थाना ट्रांस यमुना, जिला आगरा; मूल निवासी नगला जसवार, थाना गोंडा, जिला अलीगढ़) के खिलाफ लिखाया गया था। घटना के एक सप्ताह बाद 27 जुलाई 2025 को वादिया की पुत्री स्वयं घर लौट आई थी।
अदालत में पीड़िता की अहम गवाही:
न्यायालय में विचारण के दौरान केवल तीन लोगों- वादिया (पीड़िता की मां), स्वयं पीड़िता और मुकदमे के विवेचक सुहेल अंसारी की ही गवाही दर्ज हुई।
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गवाही के दौरान मामले में उस समय नया मोड़ आ गया जब पीड़िता ने अदालत में सच्चाई बयान की। पीड़िता ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि घटना वाले दिन वह किसी के साथ गई नहीं थी, बल्कि अपने परिजनों से नाराज होकर खुद ही मथुरा-वृंदावन चली गई थी।
उसने अदालत को बताया कि वह आरोपी प्रमोद को बिल्कुल नहीं जानती है और ना ही वह कभी उसके साथ गई।
न्यायालय का फैसला:
विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) माननीय सोनिका चौधरी ने मामले की विस्तृत सुनवाई की। अदालत ने पीड़िता के स्पष्ट बयान और बचाव पक्ष के अधिवक्ता विनय गौड़ की दलीलों का भली-भांति अवलोकन किया।
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अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ कोई भी साक्ष्य सिद्ध करने में पूरी तरह विफल रहा है।
साक्ष्यों के घोर अभाव और पीड़िता की गवाही के आधार पर न्यायालय ने आरोपी प्रमोद कुमार को सभी आरोपों से दोषमुक्त करार देते हुए बरी कर दिया।
इसके साथ ही, अदालत ने न्याय प्रक्रिया का दुरुपयोग कर निर्दोष व्यक्ति के खिलाफ झूठा मुकदमा लिखाने के आरोप में वादिया के विरुद्ध विधिक कार्यवाही शुरू करने के भी सख्त आदेश पारित किए हैं।
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