आगरा/प्रयागराज ।
आजम खान की रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट यूनिवर्सिटी के मामले में रामपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक कैविएट एप्लीकेशन दाखिल की है।
यह कदम प्राधिकरण द्वारा यूनिवर्सिटी परिसर में बिना स्वीकृत मानचित्र के बनाए गए 38 भवनों को लेकर जारी किए गए ध्वस्तीकरण नोटिस के तुरंत बाद उठाया गया है।
क्या है पूरा मामला ?
* रामपुर विकास प्राधिकरण ने 15 जुलाई, 2026 को उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम, 1973 की धारा 27(1) के तहत ध्वस्तीकरण का आदेश पारित किया है।
* इस आदेश के तहत यूनिवर्सिटी प्रशासन को अवैध निर्माणों को 20 दिनों के भीतर स्वतः हटाने का निर्देश दिया गया है।
* नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि यदि जौहर ट्रस्ट तय 20 दिनों की समय-सीमा के भीतर इन निर्माणों को खुद नहीं हटाता है, तो रामपुर विकास प्राधिकरण इसे अपने स्तर पर ध्वस्त करने की कार्यवाही करेगा।

कैविएट दाखिल करने का कानूनी कारण:
* संभावित कानूनी चुनौती को देखते हुए आरडीए ने जौहर ट्रस्ट के इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचने से पहले ही यह कैविएट दाखिल कर दी है।
* प्राधिकरण ने अदालत में कहा है कि उसे पूर्ण विश्वास और अंदेशा है कि इस ध्वस्तीकरण आदेश की वैधानिकता को चुनौती देते हुए ट्रस्ट और उसके रजिस्ट्रार जल्द ही हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सकते हैं।
* कैविएट के माध्यम से यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के तहत, हाईकोर्ट द्वारा कोई भी अंतरिम राहत या स्टे ऑर्डर (स्थगनादेश) पारित करने से पहले आरडीए के अधिवक्ताओं को अपना पक्ष रखने का पूरा मौका दिया जाए।
आगे की प्रक्रिया:
विधिक दृष्टिकोण से अब यह माना जा रहा है कि जौहर यूनिवर्सिटी प्रशासन ध्वस्तीकरण की कार्यवाही से बचने और किसी भी प्रकार की त्वरित राहत पाने के लिए अपनी निर्धारित समय-सीमा समाप्त होने से पहले ही इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख करेगा।
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