आगरा/प्रयागराज।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक मामले में जमानत अर्जी के निस्तारण में पुलिस अधिकारियों की लापरवाही के कारण हुई 10 दिन से अधिक की देरी पर कड़ा रुख अपनाया है।
न्यायालय ने इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए उत्तर प्रदेश सरकार पर 50 हजार रुपये का हर्जाना लगाया है।
जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की सिंगल बेंच में हुई इस मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने निर्देश दिया कि हर्जाने की यह 50 हजार रुपये की राशि याचिकाकर्ताओं को अदा की जाए।
इसके साथ ही, न्यायालय ने राज्य सरकार को यह कानूनी छूट भी प्रदान की है कि वह विभागीय जांच के बाद संबंधित लापरवाह पुलिस अधिकारियों से इस राशि की वसूली कर सकती है।
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प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह आदेश बिजनौर जिले के चांदपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत दर्ज दहेज हत्या के एक मामले में पारित किया गया है।
अदालत यासीन व अन्य (आरोपी सास और ससुर) की ओर से दाखिल जमानत अर्जी पर सुनवाई कर रही थी।
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मामले के तथ्यों और पुलिस रिपोर्ट पर विचार करते हुए अदालत ने पाया कि पत्रावली पर ऐसा कोई पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध नहीं है, जिससे यह साबित हो सके कि मृतका को दहेज की मांग पूरी न होने के कारण प्रताड़ित किया गया था।
कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि मामले में स्वतंत्र गवाहों के बयान भी पति-पत्नी के बीच केवल एक सामान्य घरेलू विवाद की ओर ही इशारा करते हैं।
इन सभी परिस्थितियों, साक्ष्यों के अभाव और जांच में हुई बेवजह की देरी को संज्ञान में लेते हुए, अदालत ने दोनों आरोपियों को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है।
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