आगरा/प्रयागराज।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गैंगस्टर एक्ट के तहत दर्ज एक मामले में गौ तस्कर मोहम्मद मुजफ्फर को बड़ी राहत देते हुए उसकी जमानत याचिका मंजूर कर ली है।
जस्टिस कृष्ण पहल की सिंगल बेंच ने मामले के तथ्यों और गुण-दोष पर बिना कोई टिप्पणी किए मुजफ्फर को सशर्त जमानत देने का आदेश पारित किया।
यह मामला प्रयागराज के गंगानगर जोन स्थित फूलपुर थाने में गैंगस्टर और असामाजिक गतिविधियां (निवारण) अधिनियम की धारा 2/3 के तहत दर्ज किया गया था, जिसमें अब हाईकोर्ट से आरोपी को राहत मिली है।
बचाव पक्ष की दलीलें:
अदालत में सुनवाई के दौरान मुजफ्फर के वकील ने अपने मुवक्किल के खिलाफ 51 आपराधिक मामलों के इतिहास की जानकारी दी।
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बचाव पक्ष की ओर से दलील दी गई कि गैंगस्टर एक्ट की यह कार्रवाई केवल दो मामलों के आधार पर की गई है और इन दोनों ही मामलों में आरोपी को पहले ही जमानत मिल चुकी है।
वकील ने अदालत को बताया कि मुजफ्फर 14 अक्टूबर 2023 से जेल में बंद है। बचाव पक्ष का मुख्य तर्क यह था कि जेल में रहने की अवधि के दौरान ही आरोपी के खिलाफ 26 नए मामले दर्ज कर दिए गए, जो कि व्यावहारिक रूप से किसी भी व्यक्ति के लिए असंभव है।
राज्य सरकार का पक्ष:
राज्य सरकार की ओर से इस जमानत याचिका का कड़ा विरोध किया गया। सरकारी वकील ने अदालत को अवगत कराया कि जेल जाने से पहले ही मुजफ्फर पर 29 मामले दर्ज थे।
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सरकार की ओर से यह दलील दी गई कि आरोपी एक आदतन अपराधी है और इलाके में उसका भारी खौफ व्याप्त है, इसलिए उसे जमानत जैसी कोई राहत नहीं दी जानी चाहिए।
न्यायालय का निर्णय:
दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मोहम्मद मुजफ्फर की जमानत अर्जी को स्वीकार कर लिया और उसे शर्तों के साथ जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।
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