आगरा।
विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट माननीय सोनिका चौधरी की अदालत ने मुकदमों के निस्तारण में हो रही लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए सख्त रुख अपनाया है।
न्यायालय ने गवाही के लिए उपस्थित न होने पर थाना एकता में तैनात उपनिरीक्षक प्रदीप कौशिक का वेतन रोकने के निर्देश पुलिस आयुक्त आगरा और मुख्य कोषाधिकारी आगरा को दिए हैं।
मामले की पृष्ठभूमि न्यायालय के समक्ष थाना अछनेरा से संबंधित राज्य बनाम दुर्गेश का मामला विचारण के लिए लंबित है।
यह मामला दुराचार और पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज किया गया था। इस प्रकरण की विवेचना पूर्व में उपनिरीक्षक प्रदीप कौशिक द्वारा की गई थी।
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कार्यवाही में देरी पर न्यायालय की सख्ती अदालती कार्यवाही के दौरान इस प्रकरण में उक्त विवेचक के अतिरिक्त अन्य सभी गवाहों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं।
केवल विवेचक की गवाही शेष है, लेकिन उपनिरीक्षक प्रदीप कौशिक न्यायालय में अपना बयान दर्ज कराने के लिए उपस्थित नहीं हो रहे थे।
अदालत ने पाया कि विवेचक के लगातार हाजिर न होने के कारण मुकदमे के अंतिम निस्तारण में अनावश्यक विलंब हो रहा है।
इस स्थिति पर संज्ञान लेते हुए विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट ने न्याय प्रक्रिया को गति देने के उद्देश्य से उक्त उपनिरीक्षक के वेतन पर रोक लगाने के स्पष्ट आदेश पारित किए हैं।
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