आगरा उपभोक्ता आयोग प्रथम का एलआईसी के खिलाफ अहम फैसला, परिवादिनी को बकाया राशि ब्याज सहित लौटाने का आदेश

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आगरा के जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग-प्रथम ने भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के खिलाफ एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।

आयोग ने एलआईसी को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार संव्यवहार का दोषी मानते हुए परिवादिनी श्रीमती अंजली जैन को 1,45,620/- रुपये की बकाया धनराशि 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज के साथ अदा करने का आदेश दिया है।

यह मामला 23 दिसंबर 2023 को दायर किया गया था। कमला नगर, आगरा की निवासी श्रीमती अंजली जैन ने 26 सितंबर 2003 को एलआईसी से 5 लाख रुपये की बीमित राशि वाली एक पॉलिसी खरीदी थी।

इस पॉलिसी का वार्षिक प्रीमियम 31,986/- रुपये था और यह 20 वर्ष की अवधि पूर्ण होने पर वर्ष 2023 में परिपक्व होनी थी।

पॉलिसी की शर्तों के अनुसार, परिवादिनी को लाभ वापसी के संबंध में दो विकल्प दिए गए थे।

प्रथम विकल्प के तहत प्रत्येक दूसरे वर्ष बीमित राशि की 2 प्रतिशत धनराशि वापस होनी थी।

द्वितीय विकल्प के तहत यदि प्रथम विकल्प नहीं चुना जाता है, तो परिपक्वता राशि के साथ प्रत्येक दो वर्ष में 2 प्रतिशत के हिसाब से बन रही पूरी धनराशि जोड़कर दी जानी थी।

पॉलिसी खरीदते समय भूलवश परिवादिनी द्वारा किसी भी विकल्प का चयन नहीं किया गया था।

एलआईसी ने परिपक्वता के समय परिवादिनी को कुल 12,00,000/- रुपये का भुगतान किया।

परिवादिनी ने जब संपर्क किया तो पता चला कि उनके पति द्वारा खरीदी गई बिल्कुल वैसी ही पॉलिसी पर एलआईसी ने 13,45,620/- रुपये का भुगतान किया था।

एलआईसी का तर्क था कि विकल्प न चुनने के कारण उन्हें 1,45,620/- रुपये का कम भुगतान किया गया है।

आयोग के अध्यक्ष माननीय सर्वेश कुमार और सदस्य राजीव सिंह ने मामले की सुनवाई करते हुए पाया कि विकल्प चयन न करने की स्थिति में एलआईसी को स्वयं ही प्रत्येक दो वर्ष बाद 2 प्रतिशत राशि का भुगतान करना चाहिए था, जो उन्होंने नहीं किया।

आयोग ने माना कि एलआईसी ने परिवादिनी को मिलने वाली लाभ की धनराशि को 20 वर्ष तक अपने कार्यों में प्रयोग किया, जो अनुचित व्यापार संव्यवहार और सेवा में कमी है।

15 जुलाई 2026 को सुनाए गए अपने निर्णय में आयोग ने एलआईसी को आदेश दिया है कि वह 45 दिनों के भीतर 1,45,620/- रुपये की शेष राशि 28 सितंबर 2023 से वास्तविक अदायगी तक 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज के साथ जिला आयोग के खाते में जमा करे।

इसके अतिरिक्त, आयोग ने मानसिक पीड़ा के लिए 10,000/- रुपये और वाद व्यय के रूप में 5,000/- रुपये का भुगतान करने का भी निर्देश दिया है।

यदि एलआईसी 45 दिन के भीतर भुगतान करने में चूक करती है, तो उसे 6 प्रतिशत के स्थान पर 9 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज देना होगा।

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विवेक कुमार जैन
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